सत्यता मन से- अभी से सत्य की ओर - Satyata man se abhi se satya ki or

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Veracity is a question that establishes a decent and competent society. Nothing like this appears in the current environment, if we were on the truth then we would have humanity inside us and we are called humans. Nothing like this currently appears, is everything due to truth? There was no such environment that would have adopted the trut in hindi, False is obtained from false this is also truth in hindi, Unreal starting from your home this is also a fact. We never gave importance to truth What did the false / falsehood get?.  As well as contaminating the atmosphere of our home, it has reached the society. Today we all preach, humanity this no longer. The words of compassion were left to the words in hindi, Where is the birth of untruth darkness spreads in the same place in hindi, Wrath of false first of all it spoils our home. The result started unreal speaking, instead of four times the false found. Unreal did not leave his house where he was born. Therefore truthfulness with a heart- from now to the truth in hindi, Culture was born of truth in hindi, Culture originated from all the deities who came into this great country. The details of all these are mentioned in our Vedas-Puranas. This truth has been going on for years our culture is still running on these trails. The foundation of this culture is based on Truthfulness in hindi, Due to  Truthfulness this culture is coming from the ages because the truth is that I have so much power. We are ignoring this power, that is removing its culture from ourselves. Whereas truth is this, our mythological culture can not end this is the truth. So once again read and write to our culture in hindi, Truth is the only mantra of purification in hindi, Due to falsehood, mind and humanity which has become contaminated today, surely it will be purification only with truthfulness in hindi, Due to this the Sanskrit environment itself will be re-established in hindi, सत्यता-मन-से-अभी-से-सत्य-की-ओर, Satyata-man-se-abhee-se-satya-ki-or, Truthfulness with a heart- from now to the truth in hindi, Lie is obtained from lie, this is also truth in hindi, Where is the lie birth, it spreads darkness in the same place in hindi, Culture was born from truthness in hindi, Truth is the only mantra of purification in hindi, संक्षमबनों इन हिन्दी में, संक्षम बनों इन हिन्दी में, sakshambano in hindi, saksham bano in hindi,  क्यों सक्षमबनो इन हिन्दी में, क्यों सक्षमबनो अच्छा लगता है इन हिन्दी में?, कैसे सक्षमबनो इन हिन्दी में? सक्षमबनो ब्रांड से कैसे संपर्क करें इन हिन्दी में, सक्षमबनो हिन्दी में, सक्षमबनो इन हिन्दी में, सब सक्षमबनो हिन्दी में,अपने को सक्षमबनो हिन्दीं में, सक्षमबनो कर्तव्य हिन्दी में, सक्षमबनो भारत हिन्दी में, सक्षमबनो देश के लिए हिन्दी में,खुद सक्षमबनो हिन्दी में, पहले खुद सक्षमबनो हिन्दी में, एक कदम सक्षमबनो के ओर हिन्दी में, आज से ही सक्षमबनो हिन्दीें में,सक्षमबनो के उपाय हिन्दी में, अपनों को भी सक्षमबनो का रास्ता दिखाओं हिन्दी में, सक्षमबनो का ज्ञान पाप्त करों हिन्दी में,सक्षमबनो-सक्षमबनो हिन्दीें में, kiyon saksambano in hindi, kiyon saksambano achcha lagta hai in hindi, kaise saksambano in hindi, kaise saksambano brand se sampark  in hindi, sampark karein saksambano brand se in hindi, saksambano brand in hindi, sakshambano bahut accha hai in hindi, gyan ganga sakshambnao se in hindi, apne aap ko saksambano in hindi, ek kadam saksambano ki or in hindi,saksambano phir se in hindi, ek baar phir saksambano in hindi, ek kadam saksambano ki or in hindi, self saksambano in hindi, give advice to others for saksambano, saksambano ke upaya in hindi, saksambano-saksambano india in hindi, saksambano-saksambano phir se in hindi,, असत्य से असत्य की प्राप्ति होती है, यह भी सत्य है,  Asatya se asatya ki prapti hoti hai, yah bhi satya hai , असत्य का जन्म जहां होता है, उसी स्थान में अंधकार फैला देता है Asatya ka janam jahan hota hai, usee sthaan mein andhakar phaila deta hai, सत्यता से अवतरित हुई संस्कृति, Satyata se avatarit huee sanskrti,सत्यता ही शुद्धीकरण का एक मात्र मंत्र,Satyata hee shudheekaran ka ek matr mantra,Truthfulness with a heart- from now to the truth in hindi, Lie is obtained from lie, this is also truth in hindi, sakshambano in hindi, aaj hi sakshambano in hindi, phir sakshambano in hindi, phir se sakshambano in hindi, saksham gyan in hindi, dharmik bano in hindi, dharam ke barein mein in hindi, man se aaj hi, abhi se man se in hindi, phir man se in hindi, aaj ka Satya hindi, aaj ki prasani hindi, aaj aise hi ho raha hai hindi, aaj har ghar ki aise hi kahani hai hindi, Satya ki pahchan karo hindi, Satya hi safal hai hindi, aaj se hi satya ki pahal hindi, abhi se Satya hindi, sab karo aise hindi, Satya balsari hota hai hindi, Satya se sakshambano hindi, satya hi sakshambano hai hindi, Satya se kaise safalta milti hai hindi,

सत्यता मन से- अभी से सत्य की ओर
(Truthfulness with heart - now to the truth) 
  • (Satyata man se abhi se satya ki or in hindi) : मनुष्य का जीवन 84 करोड़ जन्म-मरण के बाद होता है यह एक सत्यता है। और हम इस सत्यता को अभी भी स्वीकार नहीं कर पाये। हमें मनुष्य जीवन के महत्व का पूरा ज्ञान नही है क्या है। ? इसका उत्तर हम लोग स्वयं समझ सकते है। सत्यता एक ऐसा प्रश्न है जिससे एक सभ्य और सक्षम समाज की स्थापना होती है। वर्तमान वातारण में ऐसा कुछ नही दिखाई देता अगर हम सत्यता पर होते तो हमारे अन्दर मानवता होती और हम मनुष्य कहलाते। वर्तमान में ऐसा कुछ नही दिखाई देता क्या सबका कारण सत्यता? अगर सत्यता को अपनाया होता ऐसा वातावरण न होता। Click » Sakshambano Human life comes after 84 million births and deaths it is a true. We are not accepting this truthfulness. We do not have full knowledge of the importance of human life?. Ourselves it's we can answer. Veracity is a question that makes a decent and competent society. Nothing looks in current environments,  if we are on the truths then we would have humanity inside us and we are called humans. Nothing like this currently appears is it only reason of truth? if truth would have been adopted there is no such atmosphere.
  • असत्य से असत्य की प्राप्ति होती है, यह भी सत्य है- (Lie is obtained from lie, this is also truth) : असत्य को अपने घर से आरम्भ किया यह भी एक सत्यता है। सत्यता को हमने कभी महत्व दिया ही नही झूठ/असत्य से क्या प्राप्त हुआ? अपने घर के वातारण को दूषित करने के साथ-साथ समाज तक पहुंचा  दिया। आज हम सब प्रवचन देते है मानवता रह नही गई। दया संवेदना के शब्द तो शब्दों तक ही रह गये। The lie startared from  home this is also a fact. We never gave importance to truth What got from lie?.  As well contaminating the atmosphere of home, it has reached the society. Today we all preach of humanity the humanity is no longer. The words of compassion were left to the words.
  • असत्य का जन्म जहां होता है, उसी स्थान में अंधकार फैला देता है- (Where is the lie birth, it spreads darkness in the same place) : असत्य का प्रकोप सबसे पहले अपने घर को दूषित करता है। परिणाम असत्य बोलना आरम्भ किया बदले में चार गुना असत्य मिला। असत्य ने अपने घर को तक नहीं छोड़ा जहां उसका जन्म हुआ। इसलिए सत्यता को मन से अभी से सत्य की ओर चले। First of all the lie outbreak spoils our home. It's result started lying, instead of these got four times false found. Lie did not leave his house where he was born. Therefore truthfulness with a heart- from now to the truth.
  • सत्यता से अवतरित हुई संस्कृति- (Culture was born from truthness) : इस महान देश में जितने भी देवता अवतरित हुये उन्हीं के द्वारा संस्कृति की उत्पत्ति हुई।  इन सभी का विवरण हमारे वेदों-पुराणों अंकित है। यह सच्चाई वर्षों से चली आ रही है इन्हीं के पथ-चिन्हों पर हमारी संस्कृति अभी तक चली आ रही है। इस संस्कृति का आधार शिला सत्यता पर आधारित है। सत्यता के कारण युगों से यह संस्कृति चली आ रही है क्योंकि सत्यता मैं इतनी शक्ति है। हम इस शक्ति की अनदेखी कर रहे है अर्थात् अपनी संस्कृति को अपने से दूर कर रहे है।  जबकि सत्यता यह है हमारी पौराणिक संस्कृति का अंत हो ही नही सकता यह भी एक सत्यता है। इसलिए एक बार फिर अपनी संस्कृति की ओर पढ़-लिख-चले। Culture originated by all the deities who came into this great country. The details of all these are mentioned in our Vedas-Puranas. This truth is going on many years our culture is still running on these trails. The foundation of this culture is based on Truthfulness. Due to  Truthfulness this culture is coming from many years because the truth is that we have so much power. We are ignoring this power we are going away  from our culture. Whereas truth is this our mythological culture can not end this is the truth. So once again read and write to our culture.
  • सत्यता ही शुद्धीकरण का एक मात्र मंत्र- (Truth is the only mantra of purification) : असत्यता के कारण मन और मानवता जो आज दूषित हो गई है, उसका निश्चित रूप से सत्यता से ही शुद्धीकरण होगा।  इसके कारण स्वतः ही संस्कृतिमय वातावरण की पुनः स्थापना होगी। The humanity which has become contaminated today due to lie, surely its will be purification by truthfulness. Due to this the sanskrit atmosphere itself will be re-established.


सक्षमबनो Sakshambano -समृद्ध राष्ट् के निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की स्वयं की भागीदारी अति जरूरी।