कर्तव्य स्वयं परिचय सेे परिचत कराता है- Kartavya swayam parichay se parichit karata hai

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कर्तव्य स्वयं परिचय सेे परिचत कराता है 
(Obligation gives own introduce)
  • भगवान विष्णु विभिन्न युगों में मनुष्य रूप में अवतरित हुये और सामान्य मनुष्य की तरह विभिन्न कष्टों के भागीदार बने। उन्होंने कर्म, कर्तव्य निष्ठा के प्रति मनुष्य को अपने ब्रहमवचनों से शिक्षा दी। देवताओं द्वारा दी गई शिक्षा निर्देशों को ऋषि-मुनियों ने वेदों और पुराणों अंकित किया। जिसे आज हम सब अपने धार्मिक पुस्तकों से अवगत होते है। इन्हीं कर्तव्यों से मनुष्य ने अपना जीवन आरम्भ किया और संस्कृति की उत्पत्ति हुई। भारतीय संस्कृति में कर्तव्य का प्राचीनकाल से ही अत्यधिक महत्व है। पहले पूर्ण रूप से कर्तव्य का पालन होता था और समयानुसार कर्तव्य के प्रति व्यक्ति की निष्ठ कम होने लगी है। जिसका प्रकोप पूरे समाज तेजी फैलता जा रहा है। (Kartavya swayam parichay se parichit karata hai in hindi) Lord Vishnu became a part of human beings in various ages and became a part of various hardships like ordinary people. They educated human & teach his spiritual words to deed, conscientiousness.Education given by the Gods, the sages and monks inscribed the Vedas and Puranas. Today we all read from our religious books. Man started his life with these obligation and the culture was born. Importance of obligation is since ancient times. Firstly obligation was to be obey completely and at the time the person's dedication towards conscientiousness has decreased. The outbreak of which is spreading the whole society rapidly.
कर्तव्य से ही एकता का जन्म होता है
(Unity is born from Obligation) 

  • मनुष्य को अगर अपने कर्तव्य की पहचान हो जाए तो उसमें स्वयं सद्गुण आने लगते है। उसे सत्यता की पहचान के साथ-साथ उसकी शक्ति का अहसास होता है। भारतीय संस्कृति ने कर्तव्य को पूर्णतः अपनाया और इससे संबंधित जानकारी हम अपने बुर्जुगों से सुनते है। उन्होंने अपने कर्तव्य को किस तरह निभाया और परिवार में एकता की बुनियाद बनायी रखी। आज के वातावरण में ऐसा कुछ नही दिखाई देता, कर्तव्य शब्द अनसुना लगता है। कर्तव्य शब्द सुनते ही व्यक्ति विचलित हो जाता है। (Kartavya se hi ekta ka janam hota hai in hindi) If a person becomes aware of his duty then the Virtue themselves begin to appear in him. He realizes his power as well as the identity of truth. Indian culture fully embraced duty and we hear about it related to our elderly people. How did they complete own Obligations and kept unity in the family. Nothing like thatg appears in today's environment, Obligation word seems unheard. The person gets distracted when he hears the obligation word. Click » Sakshambano
कर्तव्य किसके प्रति होना चाहिए ?
(Obligation should be towards whom?) 

  • आज ऐसा वातावरण है, प्रत्येक व्यक्ति कर्तव्य के प्रति असंम्जय में है। उसे नही मालूम अपना प्रथम कर्तव्य क्या है? इसी कारण मनुष्य सर्व सम्पन्न होने के बाद भी किसी न किसी कारण दुःखी है। अगर कर्तव्य की परंपरा वैसी चली आ रही होती, जैसा कि हमने अपनी संस्कृति से सुना है। तो मनुष्य जीवन का महत्व और अधिक बढ़ जाता। (Kartavya kiske prati hona chahiye? in hindi) Today is such an environment every person is confused towards obligation. He does not know what his first obligation is? these reasons he is unhappy and he is also unhappy after get everything. If the tradition of obligation would have been come like this. Would have been as we have heard from our culture. So the So the importance of human life definitely would be increased.
सच्चाई से दूरी क्यों? 
(Why the distance from the truth?)
  • मनुष्य जीवन में प्रत्येक व्यक्ति का पहला कर्तव्य अपने माता-पिता के प्रति होता है। यह एक सच्चाई है इसे तो देवताओं ने भी स्वीकार किया है। तभी से वेदों और पुराणों में अंकित होकर सदा-सदा के लिए अमर हो गया। अधिकतर व्यक्ति कहते है - इसमें कहने वाली क्या बात है, इसमें कौन सी नई बात है, यह तो मुझे बचपन से मालूम है। वह यह भूल जाता है- बचपन में सिखाया गया कर्तव्य याद है पर उसे अभी तक अपने व्यक्तित्व लाना जरूरी नही समझा। प्रत्येक व्यक्ति अपने घर में कर्तव्य की बात निश्चित तौर पर करता रहता है पर कर्तव्य के प्रति असंम्जय में है। उसे नही मालूम मैं अपना कर्तव्य किसके प्रति पूरा करूं? मनुष्य जीवन में माता-पिता के प्रति अपना कर्तव्य निष्ठा के साथ पूरा करना चाहिए। इस सत्यता से अवगत होकर मनुष्य को कर्तव्य शब्द की पुनरावृत्ति नही करनी पड़ेगी। इसी से सत्यता अनन्त काल तक बनी रहेगी। (Sachai se doori kyon? in hindi) Every person's first duty in human life is to his parents. It is a true that the gods accept also it. From then inscribed into Vedas and Puranas by becomed immortal forever. Maximum people says-what is the point of saying, What's new in this, like this I know from childhood. He forgets obligation, only remember obligation word but don't understand it is necessary to bring it in own personality. Each person talks definitely about duty in own house but his is confused about obligation. He does not know duties? who has duty towards? In human life our duty should be towards own parents. Being aware of this truth man will not have to repeat the word of duty. This is the truth surely it will be continue.
कर्तव्य का मनुष्य के जीवन में महत्व
(Significance of obligation in importance of human life)

  • भारतीय संस्कृति में मनुष्य को कई पीढ़ियों तक उसके कर्तव्य के कारण जाना जाता है। कर्तव्य सत्यता का महत्व इतना अधिक है, आने वाली पीढ़ियों तक उसका प्रभाव बना रहता है। मनुष्य जीवन में हर व्यक्ति का प्रथम कर्तव्य के साथ-साथ, सामाजिक जीवन में भी कर्तव्य निष्ठा की अति आवश्यकता है। मैं अपनी संस्कृति की सत्यता की पुनरावृत्ति कर रही हूं। (Kartavya ka manushy ke jeevan mein mahatva in hindi) In Indian culture man is known for many generations due to his duty. The importance of obligation is so much that its effect remains to the coming generations. Every person's first duty in human life along with conscientiousness is also a necessity in social life. I am repeating the truth of our culture.

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