माँ भुवनेश्वरी के 108 नाम

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उत्तराखंड में भुवनेश्वरी शक्तिपीठ पहला मंदिर है in hindi, इस मंदिर की यह विशेषता है in hindi, यहाँ देवी की श्रृंग के रूप में पूजा होती है in hindi, स्कंध पुराण के अनुसार बह्मा के in hindi, मानस पुत्र दक्ष प्रजापति के यज्ञ में पार्वती का n hindi, शरीर शांत होने पर शिव ने हरिद्वार कनखल में प्रजापति को सबक सिखाया in hindi, पार्वती के सती हो जाने पर उनका जला शरीर लेकर n hindi, वे आकाश मार्ग से गुजरे n hindi, और तब भगवान विष्णु ने जले शरीर के 51 टुकड़े कर दिए in hindi, इसके बाद शिव ने इस पर्वत पर विश्राम किया in hindi, त्तरवाहिनी नारद गंगा की सुरम्य घाटी पर यह प्राचीनतम in hindi, आदिशक्ति माँ भुवनेश्वरी का मंदिर पौड़ी गढ़वाल in hindi, में सतपुली-बांघाट-बिलखेत-दैसण ग्राम in hindi, (सांगुड़ा in hindi,) में स्थित नदी तट पर है in hindi, यह नदी का संगम गंगा n hindi, जी से व्यासचट्टी में होता है in hindi, जहाँ भगवान वेदव्यास जी in hindi, ने श्रुति एवं स्मृतियों को वेद पुराणों के रूप में लिपिबद्ध किया थाn hindi, मंदिर के दो कक्ष हैं in hindi, मंदिर का प्रवेश द्वार उत्तर दिशा में है n hindi, एवं बाहर जाने का द्वार पश्चिम दिशा में है in hindi, मंदिर के अंतः गर्भगृह में एक छोटा मातृलिंग है in hindi, जिसकी ख्याति सर्वत्र है in hindi, भुवनेश्वरी कथानक के अनुसार अनंतकोटि ब्राह्माण्डों की नायिका हैं in hindi, ब्राह्मा, विष्णु, महेश ने उनके बांये पैर के अंगूठे के नखदर्पण में अनेक ब्राह्माण्डों को ही नहीं देखा in hindi, अपितु अनेक कोटि संख्या में ब्राह्मा n hindi, विष्णु और शिव भी देखे n hindi, भुवनेश्वरी ने उन्हें ब्राह्मणो in  hindi,, वैष्णवी in hind i hindi, और माहेश्वरी शक्तियां प्रदान की गयी in hindi hindi, एक प्रचलित मान्यता के अनुसार यहां दक्ष प्रजापति का बृहस्पतिस n hindi, नामक यज्ञ का उच्चारण हो रहा था in hindi hindi, यज्ञ को देखने की इच्छा से कैलास पर्वत से दक्ष प्रजापति की कनिष्ठ पुत्री दाक्षायणी भी आई in hindi hindi, वहाँ किसी ने उसका आदर नहीं किया in hindi hindi, पिता (दक्ष प्रजापति in hindi hindi,) के द्वारा आदर न किए जाने पर दाक्षायणी ने उत्तर दिशा की ओर मुँह कर कुशा के आसन पर बैठकर in hindi hindi, शिवजी के कमलरूपी चरणों का ध्यान किया n hindi, समाधिजन्य अग्नि in hindi hindi, से पापरहित होकर सती ने अपना शरीर जला दिया n hindi, उल्लेखनीय है कि शिव पुराण में भी बिल्व क्षेत्र का वर्णन है in  hindi, यह बिल्व क्षेत्र बिलखेत है in hindi hindi, दक्ष प्रजापति का छह महीने का निवास स्थान दैसण है in hindi, दक्ष का जहाँ गला कटा, वह निवास स्थल in hindi, अथवा उत्पत्तिस्थल सतपुली हुआ in hindi, अतः सती का यह मंदिर भुवनेश्वरी का मंदिर कहलायाin hindi, सती अग्नि समाधि अवस्था में उत्तर की ओर मुंह करके बैठी थी in hindi, इसीलिए इस मंदिर का प्रवेश द्वार उत्तर की ओर हैin hindi, इसी मंदिर के समीप अभी भी विशालकाय in hindi, वट वृक्ष विद्यमान है in hindi, जिसके नीचे बैठकर भगवान शंकर ने सती को अमर कथा सुनाई थीin hindi, एक अन्य कथा के अनुसार देवी सती के 108 अवतार हुए in hindi, जब 107 अवतार हो गये in hindi, और 108वें अवतार का समय आया in hindi, तो नारद ने सती को शिव के गले में पड़ी मुण्डमाला in hindi, के विषय में शिव से जिज्ञासापूर्ण प्रश्न करने के लिए कहा v देवी सती के पूछने पर शिवजी ने कहा in hindi, इसमें कोई शंका नहीं है ये सब तुम्हारे ही मुण्ड हैं in hindi, यह सुनकर सती बड़ी हैरान हुईं v उन्होंने फिर शिव से पूछा- क्या मेरे ही शरीर विलीन होते हैं? in hindi, आपका शरीर विलीन नहीं होता? in hindi, आपका शरीर नष्ट क्यों नहीं होता? in hindi, शिव ने उत्तर दिया देवी! क्योंकि मैं अमर कथा जानता हूँ in hindi, अतः मेरा शरीर पञ्चतत्व को प्राप्त नहीं होता in hindi, सती बोली- भगवान! इतना समय व्यतीत होने पर अब तक वह कथा आपने मुझे क्यों नहीं बताई? in hindi, शिवजी ने कहा- इस मुण्डमाला में 107 मुण्ड हैं in hindi, अब एक मुण्ड की आवश्यकता है in hindi, इसके बाद ये 108 हो जायेंगे in hindi, तब यह माला पूर्ण हो जायेगी in hindi, अगर सुनना चाहती हो in hindi, तो मैं तुम्हें कथा सुनाता हूँ in hindi, किन्तु बीच-बीच में तुम्हें हुंकारे भी देने होंगे in hindi, कथा प्रारंभ हुई बीच-बीच में हुंकारे भी आते रहे in hindi, कुछ समय बाद सती को गहरी नींद आ गई in hindi, वहां कथा स्थान के पास वट वृक्ष की शाखा पर बने घोसले में तोते का साररहित in hindi, एक अण्डा था, कथा के प्रभाव से वह सारयुक्त हो गया in hindi, उसमें से शुक शिशु उत्पन्न हुआ in hindi, और युवा हो गया। सती को नींद में देख व कथा रस में आए in hindi, व्यवधान को जानकर शुक शावक ने सती दाक्षायणी in hindi, के स्थान पर हुंकारे देने शुरू कर दिए in hindi, कथा पूर्ण हुई और शुक शावक अमरत्व प्राप्त कर गया in hindi, जब सती जागी तो शिव से आगे की कथा के लिए प्रार्थना करने लगी in hindi, शिव ने कहा- देवी क्या तुमने कथा नहीं सुनी in hindi, देवी ने कहा- मैंने तो नहीं सुनी in hindi, शिव ने पूछा तो बीच में हुंकारे कौन भरता रहा? in hindi, यहां तो इधर-उधर कोई दिखाई नहीं दे रहा है  in hindi, इस बीच शुक शावक ने वट वृक्ष से उतर कर हुंकारे देने की बात स्वयं स्वीकार की in hindi, यही शुक शावक व्यासपुत्र शुकदेव हुए in hindi, व्यास जी का निवास स्थान यहाँ से लगभग 10 मील की दूरी पर है in hindi, जिसे व्यास घाट कहते हैं in hindi, यहां पर गंगा और नारद गंगा का संगम है in hindi, माँ भुवनेश्वरी का बीजमंत्र ऐ हीं श्रीं हीं भुवनेश्वर्यैनमः in hindi, का उच्चारण करते हुए हाथ जोड़कर परिक्रमा करने मात्र से ही in hindi, मनोवांछित फल की प्राप्ति हो जाती है।दस महाविद्या शक्तियां in hindi, Click here »  मंगलमयी जीवन के लिए कालरात्रि की पूजा in hindi,  Kalratri worship for a happy life in hindi, Click here »  दुःख हरणी सुख करणी- जय माँ तारा in hindi, Click here »  माँ षोडशी in hindi, Click here »  माँ भुवनेश्वरी शक्तिपीठ in hindi, Maa Bhuvaneshwari in hindi,  Click here »  माँ छिन्नमस्तिका द्वारा सिद्धि in hindi,  Accomplishment by Maa Chhinnamasta in hindi,  Click here »  माँ त्रिपुर भैरवी in hindi, Maa Tripura Bhairavi in hindi,  Click here »  माँ धूमावती - Maa Dhumavati in hindi, Click here »  महाशक्तिशाली माँ बगलामुखी in hindi, Mahashaktishali Maa Baglamukhi in hindi, Click here »  माँ मातंगी  in hindi, Maa Matangi Devi in hindi, Click here »  जय माँ कमला-Jai Maa Kamla in hindi,  , maa bhuvaneshwari ki katha in hindi, maa bhuvaneshwari ka mandir khan hai hindi, maa bhuvaneshwari ki shakti in hindi,  maa bhuvaneshwari ke barein mein hindi, dasa maha vidya in hindi, dasa maha vidya ke barein mein in hidi, dasa maha vidya ki shakti in hindi, maa ka bhuvaneshwari avatar in hindi, amar katha in hindi, amar katha ke barein mein in hindi, jai maa bhuvaneshwari in hindi,


माँ भुवनेश्वरी के 108 नाम

ॐ महामायायै नमः। Om Mahamayayai Namah। 
ॐ महाविद्यायै नमः। Om Mahavidyayai Namah। 
ॐ महायोगायै नमः। Om Mahayogayai Namah। 
ॐ महोत्कटायै नमः। Om Mahotkatayai Namah। 
ॐ माहेश्वर्यै नमः। Om Maheshwaryai Namah। 
ॐ कुमार्यै नमः। Om Kumaryai Namah। 
ॐ ब्रह्माण्यै नमः। Om Brahmanyai Namah। 
ॐ ब्रह्मरूपिण्यै नमः। Om Brahmarupinyai Namah। 
ॐ वागीश्वर्यै नमः। Om Vagishwaryai Namah। 
ॐ योगरूपायै नमः। Om Yogarupayai Namah। 
ॐ योगिन्यै नमः। Om Yoginyai Namah। 
ॐ कोटिसेवितायै नमः। Om Kotisevitayai Namah। 
ॐ जयायै नमः। Om Jayayai Namah। 
ॐ विजयायै नमः। Om Vijayayai Namah। 
ॐ कौमार्यै नमः। Om Kaumaryai Namah। 
ॐ सर्वमङ्गलायै नमः। Om Sarvamangalayai Namah। 
ॐ हिङ्गुलायै नमः। Om Hingulayai Namah। 
ॐ विलास्यै नमः। Om Vilasyai Namah। 
ॐ ज्वालिन्यै नमः। Om Jwalinyai Namah। 
ॐ ज्वालरूपिण्यै नमः। Om Jwalarupinyai Namah। 
ॐ ईश्वर्यै नमः। Om Ishwaryai Namah। 
ॐ क्रूरसंहार्यै नमः। Om Krurasamharyai Namah। 
ॐ कुलमार्गप्रदायिन्यै नमः। Om Kulamargapradayinyai Namah। 
ॐ वैष्णव्यै नमः। Om Vaishnavyai Namah। 
ॐ सुभगाकारायै नमः। Om Subhagakarayai Namah। 
ॐ सुकुल्यायै नमः। Om Sukulyayai Namah। 
ॐ कुलपूजितायै नमः। Om Kulapujitayai Namah। 
ॐ वामाङ्गायै नमः। Om Vamangayai Namah। 
ॐ वामचारायै नमः। Om Vamacharayai Namah। 
ॐ वामदेवप्रियायै नमः। Om Vamadevapriyayai Namah। 
ॐ डाकिन्यै नमः। Om Dakinyai Namah। 
ॐ योगिनीरूपायै नमः। Om Yoginirupayai Namah। 
ॐ भूतेश्यै नमः। Om Bhuteshyai Namah। 
ॐ भूतनायिकायै नमः। Om Bhutanayikayai Namah। 
ॐ पद्मावत्यै नमः। Om Padmavatyai Namah। 
ॐ पद्मनेत्रायै नमः। Om Padmanetrayai Namah। 
 प्रबुद्धायै नमः। Om Prabuddhayai Namah। 
ॐ सरस्वत्यै नमः। Om Saraswatyai Namah। 
ॐ भूचर्यै नमः। Om Bhucharyai Namah। 
ॐ खेचर्यै नमः। Om Khecharyai Namah। 
ॐ मायायै नमः। Om Mayayai Namah। 
ॐ मातङ्ग्यै नमः। Om Matangyai Namah। 
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः। Om Bhuvaneshwaryai Namah। 
ॐ कान्तायै नमः। Om Kantayai Namah। 
ॐ पतिव्रतायै नमः। Om Pativratayai Namah। 
ॐ साक्ष्यै नमः। Om Sakshyai Namah। 
ॐ सुचक्षुष्यै नमः। Om Suchakshushyai Namah। 
ॐ कुण्डवासिन्यै नमः। Om Kundavasinyai Namah। 
ॐ उमायै नमः। Om Umayai Namah। 
ॐ कुमार्यै नमः। Om Kumaryai Namah। 
ॐ लोकेश्यै नमः। Om Lokeshyai Namah। 
ॐ सुकेश्यै नमः। Om Sukeshyai Namah। 
ॐ पद्मरागिन्यै नमः। Om Padmaraginyai Namah। 
ॐ इन्द्राण्यै नमः। Om Indranyai Namah। 
ॐ ब्रह्मचाण्डाल्यै नमः। Om Brahmachandalyai Namah। 
ॐ चण्डिकायै नमः। Om Chandikayai Namah। 
ॐ वायुवल्लभायै नमः। Om Vayuvallabhayai Namah। 
ॐ सर्वधातुमयीमूर्त्यै नमः। Om Sarvadhatumayimurtyai Namah। 
ॐ जलरूपायै नमः। Om Jalarupayai Namah। 
ॐ जलोदर्यै नमः। Om Jalodaryai Namah। 
ॐ आकाश्यै नमः। Om Akashyai Namah। 
ॐ रणगायै नमः। Om Ranagayai Namah। 
ॐ नृकपालविभूषणायै नमः। Om Nrikapalavibhushanayai Namah। 
ॐ नर्मदायै नमः। Om Narmadayai Namah। 
ॐ मोक्षदायै नमः। Om Mokshadayai Namah। 
ॐ कामधर्मार्थदायिन्यै नमः। Om Kamadharmarthadayinyai Namah। 
ॐ गायत्र्यै नमः। Om Gayatryai Namah। 
ॐ सावित्र्यै नमः। Om Savitryai Namah। 
ॐ त्रिसन्ध्यायै नमः। Om Trisandhyayai Namah। 
ॐ तीर्थगामिन्यै नमः। Om Tirthagaminyai Namah। 
ॐ अष्टम्यै नमः। Om Ashtamyai Namah। 
ॐ नवम्यै नमः। Om Navamyai Namah। 
ॐ दशम्यै नमः। Om Dashamyai Namah। 
ॐ एकादश्यै नमः। Om Ekadashyai Namah। 
ॐ पौर्णमास्यै नमः। Om Paurnamasyai Namah। 
ॐ कुहूरूपायै नमः। Om Kuhurupayai Namah। 
ॐ तिथिमूर्तिस्वरूपिण्यै नमः। Om Tithimurtiswarupinyai Namah। 
ॐ सुरारिनाशकार्यै नमः। Om Surarinashakaryai Namah। 
ॐ उग्ररूपायै नमः। Om Ugrarupayai Namah। 
ॐ वत्सलायै नमः। Om Vatsalayai Namah। 
ॐ अनलायै नमः। Om Analayai Namah। 
ॐ अर्धमात्रायै नमः। Om Ardhamatrayai Namah। 
ॐ अरूणायै नमः। Om Arunayai Namah। 
ॐ पीतलोचनायै नमः। Om Pitalochanayai Namah। 
ॐ लज्जायै नमः। Om Lajjayai Namah। 
ॐ सरस्वत्यै नमः। Om Saraswatyai Namah। 
ॐ विद्यायै नमः। Om Vidyayai Namah। 
ॐ भवान्यै नमः। Om Bhavanyai Namah। 
ॐ पापनाशिन्यै नमः। Om Papanashinyai Namah। 
ॐ नागपाशधरायै नमः। Om Nagapashadharayai Namah। 
ॐ मूर्त्यै नमः। Om Murtyai Namah। 
ॐ अगाधायै नमः। Om Agadhayai Namah। 
 ॐधृतकुण्डलायै नमः। Om Dhritakundalayai Namah। 
ॐ क्षत्ररूप्यै नमः। Om Kshatrarupyai Namah। 
ॐ क्षयकर्यै नमः। Om Kshayakaryai Namah। 
ॐ तेजस्विन्यै नमः। Om Tejaswinyai Namah। 
ॐ शुचिस्मितायै नमः। Om Suchismitayai Namah। 
ॐ अव्यक्तायै नमः। Om Avyaktayai Namah। 
ॐ व्यक्तलोकायै नमः। Om Vyaktalokayai Namah। 
ॐ शम्भुरूपायै नमः। Om Shambhurupayai Namah। 
ॐ मनस्विन्यै नमः। Om Manaswinyai Namah। 
ॐ मातङ्ग्यै नमः। Om Matangyai Namah। 
ॐ मत्तमातङ्ग्यै नमः। Om Mattamatangyai Namah। 
ॐ महादेवप्रियायै नमः। Om Mahadevapriyayai Namah। 
ॐ दैत्यहायै नमः। Om Daityahayai Namah। 
ॐ वाराह्यौ नमः। Om Varahyau Namah। 
ॐ सर्वशास्त्रमय्यै नमः। Om Sarvashastramayyai Namah। 
ॐ शुभायै नमः। Om Shubhayai Namah।

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