भूल से भी न भूलें पितरों को तर्पण करना

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 भूल से भी न भूलें पितरों को तर्पण करना

पिता को तर्पण 

श्राद्ध पक्ष के दौरान पिता को तर्पण देते समय आप पहले गंगा जल में दूध, तिल और जौ मिलाकर तीन बार पिता को जलांजलि दें। फिर जल देते समय ध्यान करें कि वसु रूप में मेरे पिता जल ग्रहण करके तृप्त हों। इसके बाद अपने गोत्र का नाम लेकर कहें कि,"गोत्रे अस्मतपिता (पिता जी का नाम) शर्मा वसुरूपत् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः"।

माता को तर्पण 

इस दौरान पहले अपने गोत्र का नाम लें। फिर बोलें  "गोत्रे मां (माता का नाम) देवी वसुरूपास्त् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जल वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः"

पितृ पक्ष में पितरों की शांति और उनकी तृप्ति के लिए ॐ पितृभ्यो नमः और ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः सबसे प्रमुख और सरल पितृ शांति मंत्र हैं।

प्रमुख पितृ शांति मंत्र

1. सामान्य पितृ नमन व शांति मंत्र:ॐ पितृभ्यो नमः

अर्थ: हम पितृ देवताओं को प्रणाम करते हैं।

2. पितृ तर्पण व शांति मंत्र:ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः

अर्थ: पितरों को स्वधा (हविष्य/अन्नदान) समर्पित है, हम उन्हें नमन करते हैं।

3. पितृ गायत्री मंत्र (शांति और समृद्धि हेतु):ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणे धीमहि तन्नो पितरो प्रचोदयात्

अर्थ: हम संपूर्ण जगत को धारण करने वाले पितृगण का ध्यान करते हैं। पितर हमें सद्बुद्धि और सही मार्ग दिखाएं।

पूजा के बाद पूरी, खीर तथा अन्य सब्जियां थाली में सजाकर गाय, कौवा, कुत्ता और चिटियों को देना अति आवश्यक है।