पितृ दोष के लक्षण और प्रभाव-Pitra Dosh Ke Lakshan Aur Prabhav

Share:

 पितृ दोष के लक्षण और प्रभाव
Symptoms and Effects of Pitra Dosh

धार्मिक ग्रंथ के अनुसार श्राद्ध करना अति जरूरी होता है, अगर किसी मनुष्य का विधिवत् श्राद्ध और तर्पण न किया गया हो तो उसे इस लोक से मुक्ति नही मिलती और भूत-पे्रत के रूप में इसी संसार में रह जाता है। धर्म ग्रथों के अनुसार श्राद्ध का अत्यधिक महत्व है। पितरों को पितृ लोक में भ्रमण करने से मुक्ति मिलती है और इसके साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। पितरों का श्राद्ध करने से पितर आर्शीवाद के साथ-साथ  पितर ऋण से भी मुक्ति मिलती है। 

श्राद्धों में ब्राहमणों को भोजन करवाना अति जरूरी होता है इसके बिना श्राद्ध की प्रक्रिया अधूरी होती है। ब्राहमणों के साथ- साथ वायु रूप में पितृ भी भोजन करते है।  ब्राहमणों द्वारा किया गया भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है।ब्राहमणों की तृप्ति के साथ-साथ पितरों को भी तृप्ति मिलती है। ब्राहमण को आमत्रित कर सम्मानपूर्वक उनके द्वारा पूजा करने के बाद अपने पूर्वजों के लिए बनाया गया भोजन ब्राहमणों को भोजन करवाया जाता है। ब्राहमणों को दक्षिणा में फल, मिठाई या वस्त्र दिया जाता है। 

पितरों के लिए पसंदीदा भोजन बनाना शुभ माना जाता है।  श्राद्ध के दिन भोजन में जितनी ज्यादा से ज्यादा सब्जी हो काशीफल, दाल-चावल, पूरी व खीर बनाना शुभ माना जाता है। पितृ पक्ष श्राद्ध के दिन तर्पण का समय दोपहर 12 बजे तक शुभ माना जाता है इसे घर या नदी में किया जाना चाहिए। अपने पितरों के आवहन के लिए काले तिल, कुश का मिश्रण करके तर्पण दिया जाता है। भगवान शालीग्राम और यमराज की पूजा के साथ-साथ पितरों की पूजा की जाती है। अपनी तीन पीढियों तक के पूर्वजों का श्राद्ध करने की मान्यता है। ब्राहमणों को आदर भाव से विदा करना चाहिए ब्राहमणों के साथ-साथ पितर भी चले जाते हैं। 

धार्मिक पुराणों के अनुसार महाभारत युद्ध में कर्ण की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा स्वर्गलोक में थी। जहां उन्हें बहुत सारे गहने और सोना दिया गया।  परन्तु ऐसा कहा गया है कि तब कर्ण को भोजन की आवश्यकता थी तब भोजन नहीं मिला। इन्द्रदेव ने कहा कि जीवित रहते कर्ण ने सोना ही दान दिया और कभी भी पितृपक्ष में अपने पुर्वजों को भोजन नही दिया। इसलिए कर्ण को अपनी गल्ती सुधारने का मौका दिया गया और उन्हें 15 दिनों के लिए धरती पर भेजा गया। कर्ण ने विधिवत् अपने पितरों का श्राद्ध किया, इन्ही 15 दिनों को पितृपक्ष कहते है। 

पितृ दोष के लक्षण और प्रभाव (Symptoms & Effects)

• करियर और सफलता में बाधा: बार-बार कोशिश करने के बाद भी असफलता मिलना और आर्थिक तंगी बने रहना।

• पारिवारिक कलह: घर-परिवार में हमेशा तनाव, आपसी मनमुटाव और अशांति रहना।

• संतान से जुड़ी समस्याएं: संतान उत्पत्ति में देरी, गर्भपात होना या अस्वस्थ संतान का जन्म होना।

• स्वास्थ्य समस्याएं: अस्पष्ट और लगातार रहने वाली बीमारियां।

• स्वप्न दोष: सपनों में बार-बार मृत पूर्वजों या सांपों का दिखाई देना।