माँ तारा के 108 नाम

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maa tara image, maa tara photo, maa tara jpg, maa tara jpeg, दुःख हरणी सुख करणी in hindi, जय माँ तारा in hindi, jai maa tara in hindi,  maa tara ki katha in hindi,  maa tara ke barein mein in hindi,  maa tara ki shakti in hindi, माँ तारा का मंदिर हर मनोकामनाओं को पूरा करता है in hindi,  शिमला शहर से करीब 11 किलोमीटर की दूरी पर है in hindi,  यह मंदिर काफी पुराना है in hindi,  मान्यता है कि 250 साल पहले माँ तारा को पश्चिम बंगाल से शिमला लाया गया था in hindi,  सेन काल का एक शासक माँ तारा की मूर्ति बंगाल से शिमला लाया था in hindi,  और राजा भूपेंद्र सेन ने माँ तारा का मंदिर बनवाया था in hindi,  भगवती काली, नील वर्ण में तारा नाम से जानी जाती है in hindi,  भव-सागर से तारने वाली भी है in hindi,  जन्म तथा मृत्यु के बंधन से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करने वाली in hindi,  अपने भक्तों को भय मुक्त के साथ-साथ समस्त सांसारिक चिंताओं से मुक्ति देने वाली शक्ति हैै in hindi,  माँ तारा की अनेक प्रकार से उपासना की जाती है in hindi,  पुराणों के अनुसार भगवान बुद्ध ने भी माँ तारा की उपासना in hindi,  की और भगवान श्रीराम जी के गुरु वशिष्ठ जी ने भी पूर्णता की प्राप्ति के लिए in hindi,  माँ तारा की आराधना की थी in hindi,  यह भी कहा जाता है in hindi,  कि भगवान शिव और महापण्डित रावण भी उनकी शरण में गए थे in hindi,  माँ तारा की उत्पत्ति in hindi,  राजा स्पर्श माँ शक्ति के उपासक थे और सुबह-शाम माँ शक्ति की पूजा-पाठ किया करते थे in hindi,  माँ शक्ति ने भी उन्हें सुख के सभी साधन दिये थे in hindi,  लेकिन एक कमी थी उनके घर में कोई संतान नही थी in hindi,  यह चिन्ता उन्हें बहुत परेशान करती थी in hindi,  वह माँ शक्ति से यही प्रार्थना करते थे in hindi,  उन्हें संतान प्राप्ति का वरदान देंवे और वह भी संतान का सुख भोग सकें in hindi,  और उनके पीछे भी उनका नाम लेने वाला हो in hindi,  माँ ने उसकी पुकार सुन ली एक दिन माँ ने आकर राजा को स्वप्न दर्शन दिये in hindi,  और कहा तुम्हारी भक्ति से बहुत अति-प्रसन्न हूँ मैं तुम्हें दो पुत्रियाँ प्राप्त होने का वरदान देती हूँ in hindi,  माँ शक्ति की कृपा से राजा के घर में एक कन्या ने जन्म लिया in hindi,  राजा ने अपने राज दरबारियों in hindi,  पण्डितों, ज्योतिषों को बुलाया in hindi,  और बच्ची की जन्म कुण्डली तैयार करने का आदेश दिया in hindi,  पण्डित तथा ज्योतिषियों ने बच्ची के बारे में बताया in hindi,  कि यह कन्या तो साक्षात देवी है in hindi,  इसके कदम जहाँ पड़ेंगे वहाँ हर खुशियाँ होगी in hindi,  कन्या भी भगवती की पुजारिन होगी in hindi,  उस कन्या का नाम तारा रखा गया in hindi,  थोड़े समय बाद राजा के घर वरदान के अनुसार एक और कन्या ने जन्म लिया in hindi,  कन्या की कुण्डली सेे पण्डित और ज्योतिष उदास हो गये in hindi,  राजा ने इस उदासी का कारण पूछा in hindi,  तो वे कहने लगे की यह कन्या राजा के लिये शुभ नहीं है in hindi,  राजा ने उदास होकर ज्योतिषियों से पूछा कि उन्होंने ऐसे कौन से बुरे कर्म किये हैं in hindi,  जो कि इस कन्या ने उनके घर में जन्म लिया? in hindi,  पूर्व जन्म में दोनों कन्या देवराज इन्द्र के दरबार की अप्सराएं थी in hindi,  उन्होंने सोचा कि वे भी मृत्युलोक में भ्रमण करके देखें कि मृत्युलोक में लोग किस तरह रहते है in hindi,  दोनो ने मृत्युलोक पर आकर एकादशी का व्रत रखा in hindi,  बड़ी बहन का नाम तारा था in hindi,  तथा छोटी बहन का नाम रूक्मन in hindi,  बड़ी बहन तारा ने अपनी छोटी बहन से कहा in hindi,  कि रूक्मन आज एकादशी का व्रत है हम लोगों ने आज भोजन नहीं करना है in hindi,  इसलिए बाजार जाकर कुछ फल ले आये in hindi,  रूक्मन बाजार फल लेने के लिये गई in hindi,  वहाँ उसने मछली के पकोड़े बनते देखे उसने अपने पैसों के तो पकोड़े खा लिये और तारा के लिये फल लेकर वापस आ गई in hindi,  और फल उसने तारा को दे दिये in hindi,  तारा के पूछने पर उसने बताया कि उसने मछली के पकोड़े खा लिये है in hindi,  माँ तारा ने उसको एकादशी के दिन माँस खाने के कारण शाप दिया in hindi,  कि वह कई योनियों में गिरे और छिपकली बनकर सारी उम्र ही कीड़े-मकोड़े खाती रहे in hindi,  इसी देश में ऋषि गुरू गोरख अपने शिष्यों के साथ रहते थे in hindi,  उनके शिष्यों में एक शिष्य तेज स्वभाव और घमण्डी था in hindi,  एक दिन वो घमण्डी शिष्य पानी का कमण्डल भरकर एकान्त में जाकर तपस्या पर बैठ गया in hindi,  वो अपनी तपस्या में लीन था in hindi,  उसी समय उधर से एक प्यासी कपिला गाय in hindi,  आ गई। उस ऋषि के पास पड़े कमण्डल में पानी पीने के लिए उसने मुँह डाला in hindi,  और सारा पानी पी गई in hindi,  जब कपिता गाय ने मुँह बाहर निकाला in hindi,  तो खाली कमण्डल की आवाज सुनकर उस ऋषि की समाधि टूटी in hindi,  उसने देखा कि गाय ने सारा पानी पी लिया था in hindi,  ऋषि ने गुस्से में आ उस कपिला गाय in hindi,   को बहुत बुरी तरह चिमटे से मारा जिससे in hindi,  वह गाय लहुलुहान हो गई। यह खबर गुरू गोरख को मिली तो in hindi,  उन्होंने कपिला गाय की हालत देखी in hindi,  उन्होंने अपने उस शिष्य को उसी वक्त आश्रम से निकाल दिया in hindi, गुरू गोरख ने गाय माता पर किये गये in hindi,  पाप से छुटकारा पाने के लिए कुछ समय बाद एक यज्ञ रचाया in hindi,  इस यज्ञ का पता उस शिष्य को भी चल गया in hindi,  उसने सोचा कि वह अपने अपमान का बदला जरूर लेगा in hindi,  उस शिष्य ने एक पक्षी का रूप धारण किया in hindi,  और चोंच में सर्प लेकर भण्डारे में फेंक दियाय in hindi,   जिसका किसी को पता न चला in hindi,  वह छिपकली जो पिछले जन्म में तारा देवी की छोटी बहन थी in hindi,  तथा बहन के शाप को स्वीकार कर छिपकली बनी थी in hindi,  सर्प का भण्डारे में गिरना देख रही थी in hindi,  परोपकार की शिक्षा अब तक याद थी। वह भण्डारा होने तक घर की दीवार पर चिपकी समय की प्रतीक्षा करती रही in hindi,  कई लोगो के प्राण बचाने हेतु उसने अपने प्राण न्योछावर कर लेने का मन ही मन निश्चय किया in hindi,  जब खीर भण्डारे में दी जाने वाली थी in hindi,  बाँटने वालों की आँखों के सामने ही in hindi,  वह छिपकली दीवार से कूदकर कढ़ाई में जा गिरी in hindi,  लोग छिपकली को बुरा-भला कहते हुये in hindi,  खीर की कढ़ाई को खाली करने लगे तो in hindi,   उन्होंने उसमें मरे हुये साँप को देखा in hindi,  तब जाकर सबको मालूम हुआ कि in hindi,  छिपकली ने अपने प्राण देकर उन सबके प्राणों की रक्षा की थी in hindi,  उपस्थित सभी सज्जनों और देवताओं ने उस छिपकली के लिए प्रार्थना की in hindi,  कि उसे सब योनियों में उत्तम मनुष्य जन्म प्राप्त हो और in hindi,  अन्त में वह मोक्ष कर प्राप्ति करें in hindi,  अगले जन्म में वह छिपकली राजा स्पर्श के घर कन्या के रूप में जन्मी in hindi,  दूसरी बहन तारा देवी ने फिर मनुष्य जन्म लेकर तारामती in hindi,  नाम से अयोध्या के प्रतापी राजा हरिश्चन्द्र के साथ विवाह किया  in hindi,

माँ तारा के 108 नाम
  1. ॐ तारिण्यै नमः। Om Tarinyai Namah
  2. ॐ तरलायै नमः। Om Tarlayai Namah
  3. ॐ तन्व्यै नमः। Om Tanvyai Namah
  4. ॐ तारायै नमः। Om Tarayai Namah
  5. ॐ तरुणवल्लर्यै नमः। Om Tarunavallaryai Namah
  6. ॐ तीररूपायै नमः। Om Tirarupayai Namah
  7. ॐ तर्यै नमः। Om Taryai Namah
  8. ॐ श्यामायै नमः। Om Shyamayai Namah
  9. ॐ तनुक्षीणपयोधरायै नमः। Om Tanukshinapayodharayai Namah
  10. ॐ तुरीयायै नमः। Om Turiyayai Namah
  11. ॐ तरुणायै नमः। Om Tarunayai Namah
  12. ॐ तीव्रगमनायै नमः। Om Tivragamanayai Namah
  13. ॐ नीलवाहिन्यै नमः। Om Nilavahinyai Namah
  14. ॐ उग्रतारायै नमः। Om Ugratarayai Namah
  15. ॐ जयायै नमः। Om Jayayai Namah
  16. ॐ चण्ड्यै नमः। Om Chandyai Namah
  17. ॐ श्रीमदेकजटाशिरायै नमः। Om Shrimadekajatashirayai Namah
  18. ॐ तरुण्यै नमः। Om Tarunyai Namah
  19. ॐ शाम्भव्यै नमः। Om Shambhavyai Namah
  20. ॐ छिन्नभालायै नमः। Om Chhinnabhalayai Namah
  21. ॐ भद्रतारिण्यै नमः।  Om Bhadratarinyai Namah
  22. ॐ उग्रायै नमः। Om Ugrayai Namah
  23. ॐ उग्रप्रभायै नमः। Om Ugraprabhayai Namah
  24. ॐ नीलायै नमः। Om Nilayai Namah
  25. ॐ कृष्णायै नमः। Om Krishnayai Namah
  26. ॐ नीलसरस्वत्यै नमः। Om Nilasarasvatyai Namah
  27. ॐ द्वितीयायै नमः। Om Dvitiyayai Namah
  28. ॐ शोभनायै नमः। Om Shobhanayai Namah
  29. ॐ नित्यायै नमः। Om Nityayai Namah
  30. ॐ नवीनायै नमः। Om Navinayai Namah
  31. ॐ नित्यनूतनायै नमः। Om Nityanutanayai Namah
  32. ॐ चण्डिकायै नमः। Om Chandikayai Namah
  33. ॐ विजयाराध्यायै नमः। Om Vijayaradhyayai Namah
  34. ॐ देव्यै नमः। Om Devyai Namah
  35. ॐ गगनवाहिन्यै नमः। Om Gaganavahinyai Namah
  36. ॐ अट्टहास्यायै नमः। Om Attahasyayai Namah
  37. ॐ करालास्यायै नमः। Om Karalasyayai Namah
  38. ॐ चरास्यायै नमः। Om Charasyayai Namah
  39. ॐ अदितिपूजितायै नमः। Om Aditipujitayai Namah
  40. ॐ सगुणायै नमः। Om Sagunayai Namah
  41. ॐ असगुणायै नमः। Om Asagunayai Namah
  42. ॐ आराध्यायै नमः। Om Aradhyayai Namah
  43. ॐ हरीन्द्रदेवपूजितायै नमः। Om Harindradevapujitayai Namah
  44. ॐ रक्तप्रियायै नमः। Om Raktapriyayai Namah
  45. ॐ रक्ताक्ष्यै नमः। Om Raktakshyai Namah
  46. ॐ रुधिरास्यविभूषितायै नमः। Om Rudhirasyavibhushitayai Namah
  47. ॐ बलिप्रियायै नमः। Om Balipriyayai Namah
  48. ॐ बलिरतायै नमः। Om Baliratayai Namah
  49. ॐ दुर्धायै नमः। Om Durdhayai Namah
  50. ॐ बलवत्यै नमः। Om Balavatyai Namah
  51. ॐ बलायै नमः Om Balayai Namah
  52. ॐ बलप्रियायै नमः। Om Balapriyayai Namah
  53. ॐ बलरतायै नमः। Om Balaratayai Namah
  54. ॐ बलरामप्रपूजितायै नमः। Om Balaramaprapujitayai Namah
  55. ॐ ऊर्ध्वकेशेश्वर्यै नमः। Om Urdhvakesheshvaryai Namah
  56. ॐ केशायै नमः। Om Keshayai Namah
  57. ॐ केशवायै नमः। Om Keshavayai Namah
  58. ॐ सविभूषितायै नमः। Om Savibhushitayai Namah
  59. ॐ पद्ममालायै नमः। Om Padmamalayai Namah
  60. ॐ पद्माक्ष्यै नमः। Om Padmakshyai Namah
  61. ॐ कामाख्यायै नमः। Om Kamakhyayai Namah
  62. ॐ गिरिनन्दिन्यै नमः। Om Girinandinyai Namah
  63. ॐ दक्षिणायै नमः। Om Dakshinayai Namah
  64. ॐ दक्षायै नमः। Om Dakshayai Namah
  65. ॐ दक्षजायै नमः। Om Dakshajayai Namah
  66. ॐ दक्षिणेरतायै नमः। Om Dakshineratayai Namah
  67. ॐ वज्रपुष्पप्रियायै नमः। Om Vajrapushpapriyayai Namah
  68. ॐ रक्तप्रियायै नमः। Om Raktapriyayai Namah
  69. ॐ कुसुमभूषितायै नमः। Om Kusumabhushitayai Namah
  70. ॐ माहेश्वर्यै नमः। Om Maheshvaryai Namah
  71. ॐ महादेवप्रियायै नमः। Om Mahadevapriyayai Namah
  72. ॐ पञ्चविभूषितायै नमः। Om Panchavibhushitayai Namah
  73. ॐ इडायै नमः। Om Idayai Namah
  74. ॐ पिङ्गलायै नमः। Om Pingalayai Namah
  75. ॐ सुषुम्णाप्राणरूपिण्यै नमः। Om Sushumnapranarupinyai Namah
  76. ॐ गान्धार्यै नमः। Om Gandharyai Namah
  77. ॐ पञ्चम्यै नमः। Om Panchamyai Namah
  78. ॐ पञ्चाननादिपरिपूजितायै नमः। Om Panchananadiparipujitayai Namah
  79. ॐ तथ्यविद्यायै नमः। Om Tathyavidyayai Namah
  80. ॐ तथ्यरूपायै नमः। Om Tathyarupayai Namah
  81. ॐ तथ्यमार्गानुसारिण्यै नमः। Om Tathyamarganusarinyai Namah
  82. ॐ तत्त्वरूपायै नमः। Om Tattvarupayai Namah
  83. ॐ तत्त्वप्रियायै नमः। Om Tattvapriyayai Namah
  84. ॐ तत्त्वज्ञानात्मिकायै नमः। Om Tattvagyanatmikayai Namah
  85. ॐ अनघायै नमः। Om Anaghayai Namah
  86. ॐ ताण्डवाचारसन्तुष्टायै नमः। Om Tandavacharasantushtayai Namah
  87. ॐ ताण्डवप्रियकारिण्यै नमः। Om Tandavapriyakarinyai Namah
  88. ॐ तालदानरतायै नमः। Om Taladanaratayai Namah
  89. ॐ क्रूरतापिन्यै नमः। Om Kruratapinyai Namah
  90. ॐ तरणिप्रभायै नमः। Om Taraniprabhayai Namah
  91. ॐ त्रपायुक्तायै नमः। Om Trapayuktayai Namah
  92. ॐ त्रपामुक्तायै नमः। Om Trapamuktayai Namah
  93. ॐ तर्पितायै नमः। Om Tarpitayai Namah
  94. ॐ तृप्तिकारिण्यै नमः। Om Triptikarinyai Namah
  95. ॐ तारुण्यभावसन्तुष्टायै नमः। Om Tarunyabhavasantushtayai Namah
  96. ॐ शक्तिभक्तानुरागिन्यै नमः। Om Shaktibhaktanuraginyai Namah
  97. ॐ शिवासक्तायै नमः। Om Shivasaktayai Namah
  98. ॐ शिवरत्यै नमः। Om Shivaratyai Namah
  99. ॐ शिवभक्तिपरायणायै नमः। Om Shivabhaktiparayanayai Namah
  100. ॐ ताम्रद्युत्यै नमः। Om Tamradyutyai Namah
  101. ॐ ताम्ररागायै नमः। Om Tamraragayai Namah
  102. ॐ ताम्रपात्रप्रभोजिन्यै नमः। Om Tamrapatraprabhojinyai Namah
  103. ॐ बलभद्रप्रेमरतायै नमः। Om Balabhadrapremaratayai Namah
  104. ॐ बलिभुजे नमः। Om Balibhuje Namah
  105. ॐ बलिकल्पिन्यै नमः। Om Balikalpinyai Namah
  106. ॐ रामरूपायै नमः। Om Ramarupayai Namah
  107. ॐ रामशक्त्यै नमः। Om Ramashaktyai Namah
  108. ॐ रामरूपानुकारिण्यै नमः। Om Ramarupanukarinyai Namah
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