माँ तारा के 108 नाम

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in hindi,  पूर्व जन्म में दोनों कन्या देवराज इन्द्र के दरबार की अप्सराएं थी in hindi,  उन्होंने सोचा कि वे भी मृत्युलोक में भ्रमण करके देखें कि मृत्युलोक में लोग किस तरह रहते है in hindi,  दोनो ने मृत्युलोक पर आकर एकादशी का व्रत रखा in hindi,  बड़ी बहन का नाम तारा था in hindi,  तथा छोटी बहन का नाम रूक्मन in hindi,  बड़ी बहन तारा ने अपनी छोटी बहन से कहा in hindi,  कि रूक्मन आज एकादशी का व्रत है हम लोगों ने आज भोजन नहीं करना है in hindi,  इसलिए बाजार जाकर कुछ फल ले आये in hindi,  रूक्मन बाजार फल लेने के लिये गई in hindi,  वहाँ उसने मछली के पकोड़े बनते देखे उसने अपने पैसों के तो पकोड़े खा लिये और तारा के लिये फल लेकर वापस आ गई in hindi,  और फल उसने तारा को दे दिये in hindi,  तारा के पूछने पर उसने बताया कि उसने मछली के पकोड़े खा लिये है in hindi,  माँ तारा ने उसको एकादशी के दिन माँस खाने के कारण शाप दिया in hindi,  कि वह कई योनियों में गिरे और छिपकली बनकर सारी उम्र ही कीड़े-मकोड़े खाती रहे in hindi,  इसी देश में ऋषि गुरू गोरख अपने शिष्यों के साथ रहते थे in hindi,  उनके शिष्यों में एक शिष्य तेज स्वभाव और घमण्डी था in hindi,  एक दिन वो घमण्डी शिष्य पानी का कमण्डल भरकर एकान्त में जाकर तपस्या पर बैठ गया in hindi,  वो अपनी तपस्या में लीन था in hindi,  उसी समय उधर से एक प्यासी कपिला गाय in hindi,  आ गई। उस ऋषि के पास पड़े कमण्डल में पानी पीने के लिए उसने मुँह डाला in hindi,  और सारा पानी पी गई in hindi,  जब कपिता गाय ने मुँह बाहर निकाला in hindi,  तो खाली कमण्डल की आवाज सुनकर उस ऋषि की समाधि टूटी in hindi,  उसने देखा कि गाय ने सारा पानी पी लिया था in hindi,  ऋषि ने गुस्से में आ उस कपिला गाय in hindi,   को बहुत बुरी तरह चिमटे से मारा जिससे in hindi,  वह गाय लहुलुहान हो गई। यह खबर गुरू गोरख को मिली तो in hindi,  उन्होंने कपिला गाय की हालत देखी in hindi,  उन्होंने अपने उस शिष्य को उसी वक्त आश्रम से निकाल दिया in hindi, गुरू गोरख ने गाय माता पर किये गये in hindi,  पाप से छुटकारा पाने के लिए कुछ समय बाद एक यज्ञ रचाया in hindi,  इस यज्ञ का पता उस शिष्य को भी चल गया in hindi,  उसने सोचा कि वह अपने अपमान का बदला जरूर लेगा in hindi,  उस शिष्य ने एक पक्षी का रूप धारण किया in hindi,  और चोंच में सर्प लेकर भण्डारे में फेंक दियाय in hindi,   जिसका किसी को पता न चला in hindi,  वह छिपकली जो पिछले जन्म में तारा देवी की छोटी बहन थी in hindi,  तथा बहन के शाप को स्वीकार कर छिपकली बनी थी in hindi,  सर्प का भण्डारे में गिरना देख रही थी in hindi,  परोपकार की शिक्षा अब तक याद थी। वह भण्डारा होने तक घर की दीवार पर चिपकी समय की प्रतीक्षा करती रही in hindi,  कई लोगो के प्राण बचाने हेतु उसने अपने प्राण न्योछावर कर लेने का मन ही मन निश्चय किया in hindi,  जब खीर भण्डारे में दी जाने वाली थी in hindi,  बाँटने वालों की आँखों के सामने ही in hindi,  वह छिपकली दीवार से कूदकर कढ़ाई में जा गिरी in hindi,  लोग छिपकली को बुरा-भला कहते हुये in hindi,  खीर की कढ़ाई को खाली करने लगे तो in hindi,   उन्होंने उसमें मरे हुये साँप को देखा in hindi,  तब जाकर सबको मालूम हुआ कि in hindi,  छिपकली ने अपने प्राण देकर उन सबके प्राणों की रक्षा की थी in hindi,  उपस्थित सभी सज्जनों और देवताओं ने उस छिपकली के लिए प्रार्थना की in hindi,  कि उसे सब योनियों में उत्तम मनुष्य जन्म प्राप्त हो और in hindi,  अन्त में वह मोक्ष कर प्राप्ति करें in hindi,  अगले जन्म में वह छिपकली राजा स्पर्श के घर कन्या के रूप में जन्मी in hindi,  दूसरी बहन तारा देवी ने फिर मनुष्य जन्म लेकर तारामती in hindi,  नाम से अयोध्या के प्रतापी राजा हरिश्चन्द्र के साथ विवाह किया  in hindi, aaj hi sakshambano in hindi, abhi se sakshambano in hindi, sakshambano se fayde in hindi, sakshambano ka fayda in hindi, sakshambano se labh in hindi, sakshambano se gyan ki prapti in hindi, sakshambano website in hindi, sakshambano in hindi, sakshambano in eglish, sakshambano meaning in hindi, sakshambano ka matlab in hindi, sakshambano photo, sakshambano photo in hindi, sakshambano image in hindi, sakshambano image, sakshambano jpeg, sakshambano ke barein mein in hindi, har ek sakshambano in hindi, apne aap sakshambano in hindi, sakshambano ki apni pehchan in hindi, सक्षमबनो इन हिन्दी में in hindi, सब सक्षमबनो हिन्दी में, पहले खुद सक्षमबनो हिन्दी में, एक कदम सक्षमबनो के ओर हिन्दी में, आज से ही सक्षमबनो हिन्दी हिन्दी में, सक्षमबनो के उपाय हिन्दी में, अपनों को भी सक्षमबनो का रास्ता दिखाओं हिन्दी में, सक्षमबनो का ज्ञान पाप्त करों हिन्दी में,


माँ तारा के 108 नाम

ॐ तारिण्यै नमः। Om Tarinyai Namah

ॐ तरलायै नमः। Om Tarlayai Namah

ॐ तन्व्यै नमः। Om Tanvyai Namah

ॐ तारायै नमः। Om Tarayai Namah

ॐ तरुणवल्लर्यै नमः। Om Tarunavallaryai Namah

ॐ तीररूपायै नमः। Om Tirarupayai Namah

ॐ तर्यै नमः। Om Taryai Namah

ॐ श्यामायै नमः। Om Shyamayai Namah

ॐ तनुक्षीणपयोधरायै नमः। Om Tanukshinapayodharayai Namah

ॐ तुरीयायै नमः। Om Turiyayai Namah

ॐ तरुणायै नमः। Om Tarunayai Namah

ॐ तीव्रगमनायै नमः। Om Tivragamanayai Namah

ॐ नीलवाहिन्यै नमः। Om Nilavahinyai Namah

ॐ उग्रतारायै नमः। Om Ugratarayai Namah

ॐ जयायै नमः। Om Jayayai Namah

ॐ चण्ड्यै नमः। Om Chandyai Namah

ॐ श्रीमदेकजटाशिरायै नमः। Om Shrimadekajatashirayai Namah

ॐ तरुण्यै नमः। Om Tarunyai Namah

ॐ शाम्भव्यै नमः। Om Shambhavyai Namah

ॐ छिन्नभालायै नमः। Om Chhinnabhalayai Namah

ॐ भद्रतारिण्यै नमः।  Om Bhadratarinyai Namah

ॐ उग्रायै नमः। Om Ugrayai Namah

ॐ उग्रप्रभायै नमः। Om Ugraprabhayai Namah

ॐ नीलायै नमः। Om Nilayai Namah

ॐ कृष्णायै नमः। Om Krishnayai Namah

ॐ नीलसरस्वत्यै नमः। Om Nilasarasvatyai Namah

ॐ द्वितीयायै नमः। Om Dvitiyayai Namah

ॐ शोभनायै नमः। Om Shobhanayai Namah

ॐ नित्यायै नमः। Om Nityayai Namah

ॐ नवीनायै नमः। Om Navinayai Namah

ॐ नित्यनूतनायै नमः। Om Nityanutanayai Namah

ॐ चण्डिकायै नमः। Om Chandikayai Namah

ॐ विजयाराध्यायै नमः। Om Vijayaradhyayai Namah

ॐ देव्यै नमः। Om Devyai Namah

ॐ गगनवाहिन्यै नमः। Om Gaganavahinyai Namah

ॐ अट्टहास्यायै नमः। Om Attahasyayai Namah

ॐ करालास्यायै नमः। Om Karalasyayai Namah

ॐ चरास्यायै नमः। Om Charasyayai Namah

ॐ अदितिपूजितायै नमः। Om Aditipujitayai Namah

ॐ सगुणायै नमः। Om Sagunayai Namah

ॐ असगुणायै नमः। Om Asagunayai Namah

ॐ आराध्यायै नमः। Om Aradhyayai Namah

ॐ हरीन्द्रदेवपूजितायै नमः। Om Harindradevapujitayai Namah

ॐ रक्तप्रियायै नमः। Om Raktapriyayai Namah

ॐ रक्ताक्ष्यै नमः। Om Raktakshyai Namah

ॐ रुधिरास्यविभूषितायै नमः। Om Rudhirasyavibhushitayai Namah

ॐ बलिप्रियायै नमः। Om Balipriyayai Namah

ॐ बलिरतायै नमः। Om Baliratayai Namah

ॐ दुर्धायै नमः। Om Durdhayai Namah

ॐ बलवत्यै नमः। Om Balavatyai Namah

ॐ बलायै नमः Om Balayai Namah

ॐ बलप्रियायै नमः। Om Balapriyayai Namah

ॐ बलरतायै नमः। Om Balaratayai Namah

ॐ बलरामप्रपूजितायै नमः। Om Balaramaprapujitayai Namah

ॐ ऊर्ध्वकेशेश्वर्यै नमः। Om Urdhvakesheshvaryai Namah

ॐ केशायै नमः। Om Keshayai Namah

ॐ केशवायै नमः। Om Keshavayai Namah

ॐ सविभूषितायै नमः। Om Savibhushitayai Namah

ॐ पद्ममालायै नमः। Om Padmamalayai Namah

ॐ पद्माक्ष्यै नमः। Om Padmakshyai Namah

ॐ कामाख्यायै नमः। Om Kamakhyayai Namah

ॐ गिरिनन्दिन्यै नमः। Om Girinandinyai Namah

ॐ दक्षिणायै नमः। Om Dakshinayai Namah

ॐ दक्षायै नमः। Om Dakshayai Namah

ॐ दक्षजायै नमः। Om Dakshajayai Namah

ॐ दक्षिणेरतायै नमः। Om Dakshineratayai Namah

ॐ वज्रपुष्पप्रियायै नमः। Om Vajrapushpapriyayai Namah

ॐ रक्तप्रियायै नमः। Om Raktapriyayai Namah

ॐ कुसुमभूषितायै नमः। Om Kusumabhushitayai Namah

ॐ माहेश्वर्यै नमः। Om Maheshvaryai Namah

ॐ महादेवप्रियायै नमः। Om Mahadevapriyayai Namah

ॐ पञ्चविभूषितायै नमः। Om Panchavibhushitayai Namah

ॐ इडायै नमः। Om Idayai Namah

ॐ पिङ्गलायै नमः। Om Pingalayai Namah

ॐ सुषुम्णाप्राणरूपिण्यै नमः। Om Sushumnapranarupinyai Namah

ॐ गान्धार्यै नमः। Om Gandharyai Namah

ॐ पञ्चम्यै नमः। Om Panchamyai Namah

ॐ पञ्चाननादिपरिपूजितायै नमः। Om Panchananadiparipujitayai Namah

ॐ तथ्यविद्यायै नमः। Om Tathyavidyayai Namah

ॐ तथ्यरूपायै नमः। Om Tathyarupayai Namah

ॐ तथ्यमार्गानुसारिण्यै नमः। Om Tathyamarganusarinyai Namah

ॐ तत्त्वरूपायै नमः। Om Tattvarupayai Namah

ॐ तत्त्वप्रियायै नमः। Om Tattvapriyayai Namah

ॐ तत्त्वज्ञानात्मिकायै नमः। Om Tattvagyanatmikayai Namah

ॐ अनघायै नमः। Om Anaghayai Namah

ॐ ताण्डवाचारसन्तुष्टायै नमः। Om Tandavacharasantushtayai Namah

ॐ ताण्डवप्रियकारिण्यै नमः। Om Tandavapriyakarinyai Namah

ॐ तालदानरतायै नमः। Om Taladanaratayai Namah

ॐ क्रूरतापिन्यै नमः। Om Kruratapinyai Namah

ॐ तरणिप्रभायै नमः। Om Taraniprabhayai Namah

ॐ त्रपायुक्तायै नमः। Om Trapayuktayai Namah

ॐ त्रपामुक्तायै नमः। Om Trapamuktayai Namah

ॐ तर्पितायै नमः। Om Tarpitayai Namah

ॐ तृप्तिकारिण्यै नमः। Om Triptikarinyai Namah

ॐ तारुण्यभावसन्तुष्टायै नमः। Om Tarunyabhavasantushtayai Namah

ॐ शक्तिभक्तानुरागिन्यै नमः। Om Shaktibhaktanuraginyai Namah

ॐ शिवासक्तायै नमः। Om Shivasaktayai Namah

ॐ शिवरत्यै नमः। Om Shivaratyai Namah

ॐ शिवभक्तिपरायणायै नमः। Om Shivabhaktiparayanayai Namah

ॐ ताम्रद्युत्यै नमः। Om Tamradyutyai Namah

ॐ ताम्ररागायै नमः। Om Tamraragayai Namah

ॐ ताम्रपात्रप्रभोजिन्यै नमः। Om Tamrapatraprabhojinyai Namah

ॐ बलभद्रप्रेमरतायै नमः। Om Balabhadrapremaratayai Namah

ॐ बलिभुजे नमः। Om Balibhuje Namah

ॐ बलिकल्पिन्यै नमः। Om Balikalpinyai Namah

ॐ रामरूपायै नमः। Om Ramarupayai Namah

ॐ रामशक्त्यै नमः। Om Ramashaktyai Namah

ॐ रामरूपानुकारिण्यै नमः। Om Ramarupanukarinyai Namah

दस महाविद्या शक्तियां-Das Mahavidya