श्रावण मास में शनिदेव की पूजा बहुत जरूरी- Worship of Shani Dev is very important in the shravan month

Share:

 


shravan month importance in hindi, shravan mass mein shanidev ki pooja in hindi, shravan mass mein shanidevi pooja jaroori hai in hindi, what is the story behind shravan in hindi, why lord shiva is worship in shravan month in hindi, which god is worshipped in shravan month in hindi, why is shravan month the holiest month in the hindu in hindi,sawan mahine mein shanidev ki pooja in hindi,sawan mahine mein shani dev ki pooja bhoot hi jaroori hai in hindi,  shiv chalisa in hindi, shiv chalisa pdf in hindi, spiritual activities during shravan maas in hindi, importance and benefits in shravan month, shravan maas in hindi, sakshambano image, sakshambano ka udeshya in hindi, sakshambano ke barein mein in hindi, sakshambano ki pahchan in hindi, apne aap sakshambano in hindi, sakshambano blogger in hindi,  sakshambano  png, sakshambano pdf in hindi, sakshambano photo, Ayurveda Lifestyle keep away from diseases in hindi, sakshambano in hindi, sakshambano hum sab in hindi, sakshambano website, adopt ayurveda lifestyle in hindi, to get rid of all problems in hindi, Vitamins are essential for healthy health in hindi in hindi, शनि कृपा से अच्छे दिन अवश्य आते हैं in hindi, शनि-कृपा-से-अच्छे-दिन-अवश्य-आते-हैं in hindi, शनि महिमा की प्राप्ति कैसे होती है in hindi, शनि-कृपा से अच्छे दिन अवश्य आते हैं in hindi, आमतौर से शनि देव को अशुभ और दुःख प्रदान करने वाला माना जाता है  in hindi, लेकिन ऐसा सत्य नही है in hindi, शनिदेव का स्मरण केवल कष्टों के लिए ही नहीं अपितु सुख और समृद्धि के लिए भी किया जाता है in hindi, मनुष्य जीवन में शनि के सकारात्मक प्रभाव होते है in hindi, शनि संतुलन एवं न्याय का दाता है in hindi,  शनि देव को कर्मफलदाता माना गया है in hindi, जो मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार अच्छा या बुरा फल प्रदान करता है in hindi, यदि यमराज को मृत्यु का देव कहा जाता है  in hindi, तो वही शनि देव भी कर्म के दण्डाधिकारी है in hindi,  चाहे गलती जान बूझकर की गई हो या अनजाने में हर किसी को अपने कर्मों का दण्ड तो भुगतना ही पड़ता है in hindi, शनि देव को सूर्यदेव का पुत्र माना जाता है  in hindi, यह नीले रंग के ग्रह माने जाते हैं, in hindi, नीले रंग की किरणें पृथ्वी पर निरंतर पड़ती रहती है in hindi,  यह बड़ा है ग्रह है इसलिए धीमी गति से चलता है in hindi, एक राशि का भ्रमण करने में अढाई वर्ष तथा 12 राशियों का भ्रमण करने पर लगभग 30 वर्ष का समय लगाता है in hindi, सूर्य पुत्र शनि अपने पिता सूर्य से अत्यधिक दूरी के कारण प्रकाशहीन है in hindi, इसलिए इसे अंधकारमयी माना जाता है in hindi,  न्याय के देव-शनिदेव inhindi, शनिदेव सबके साथ बराबर का न्याय करते है in hindi, उन्होंने ने अपने पिता सूर्य देव और गुरु तक एक समान न्याय किया in hindi, पिता सूर्यदेव को शनि की दशा के कारण हनुमान जी का ग्रास बनना पड़ा  in hindi, और माता पार्वती का सती होना भी इसी का अंश था in hindi, राजा हरिशचन्द्र को उनके दान देने के गुण पर जब अभिमान हुआ in hindi तब उन्हें भी शनि प्रकोप की प्राप्ति हुई in hindi, शनिदेव की कृपा प्राप्ति के लिए शनि चरणों की ओर देखें in hindi, शनिदेव के पिता सूर्यदेव और माता छाया है in hindi, यम उनके भाई और यमी उनकी बहिन है in hindi, कहा जाता है बचपन पर भाई के साथ खेलते हुए in hindi, उनके पांव में चोट लग गई जिस कारण वह धीरे-धीरे चलने लगें in hindi, अपनी पत्नी के श्राप के कारण वह हमेशा नीचे देखते हैं in hindi, कहा जाता है अगर वह किसी को सीधी आंखों से देख लें तो उसका सर्वनाश निश्चित है in hindi, शनिदेव को तेल अतिप्रय क्यों है in hindi, हनुमान जी ने शनिदेव को रावण बंधन से मुक्त कराया था in hindi, कैद में रहने के कारण शनिदेव को काफी पीड़ा हो रही थी in hindi, तब हनुमान जी उनके शरीर पर तेल का लेप लगाया था in hindi, जिससे शनिदेव को राहत मिली थी। इसी कारण शनिदेव को शनिवार के दिन तेल चढ़ाया जाता है in hindi, और हनुमान जी की पूजा करने से शनिदेव के प्रकोप से मुक्ति मिलती है in hindi, ऊँ शं शनैश्चराय नमः in hindi, शनि कृपा-प्राप्ति के लिए in hindi, शनि निवारण के लिए शनिवार के दिन शनि मंदिर में काले कपड़ा, काली उड़द, काले तिल और तेल चढ़ाना चाहिए in hindi, शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए इस दिन पीपल में तेल का दीया अवश्य जलाना चाहिए in hindi, शनिवार के दिन तेल व काले तिल का दान करना बहुत अच्छा माना जाता है in hindi, शनिवार के दिन काला तिल और गुड़ चींटियों को खिलाना चाहिए in hindi, काला कम्बल, काला छाता, लोहे की कोई धातु, चमड़े के जूते व काली रंग की वस्तुए दान करनी चाहिए in hindi, शनिदेव का व्रत करने से भी शनि देव प्रसन्न होते है। अगर व्रत ना कर सके तो मांसाहार और मदिरापान से विशेषकर इस दिन दूर रहना चाहिए in hindi, शनि की दशा को शांत करने के लिए शुक्रवार की रात्रि में 8 सौ ग्राम काले तिल पानी में भिगो दें शनिवार को प्रातः उन्हें पीसकर एवं गुड़ में मिलाकर 8 लड्डू बनाएं और किसी काले घोड़े को खिला दें। आठ शनिवार तक यह प्रयोग करें in hindi,  शनिदोष पीड़ितों को भगवान शिव in hindi, सूर्य देव व हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए in hindi, भगवान शिव, सूर्य देव और हनुमान जी पूजा शनिवार के दिन करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है in hindi, शनिवार को काले रंग की चिड़िया खरीदें और उसे दोनों हाथों से आसमान में उड़ा दें in hindi, सारे दुःख दूर हो जायेंगे in hindi, शनिवार के दिन लोहे का त्रिशूल शिव-काल भैरव-महाकाली मंदिर में अर्पित करें in hindi, विवाह संयोग के लिए शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को 250 ग्राम काली राई को नये काले कपड़े में बांधकर पीपल के पेड़ की जड़ में रख आयें और शीघ्र विवाह कामना करें in hindi, शनिवार के दिन गेंहू पिसवाएं और गेहूं में कुछ काले चने भी मिला दें ऐसा करने से आर्थिक वृद्धि होगी in hindi, शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार को 10 बादाम लेकर हनुमान मंदिर में जायें। 5 बादाम वहां रख दें और 5 बादाम घर लाकर किसी लाल वस्त्र में बांधकर धन स्थान पर रख दें धन में उन्नति होगी in hindi, शनिवार के दिन बंदरों को काले चने, गुड़, केला खिलाएं in hindi, सरसों के तेल का छाया पत्र दान करें in hindi, बहते पानी में नारियल विसर्जित करें in hindi, काले कुत्ते को दूध पिलाएं in hindi, चीटिंयों को 7 शनिवार काले तिल, आटा, शक्कर मिलाकर खिलाएं in hindi, शनि के दिन हनुमान चालीसा का सुबह-शाम जप करना

श्रावण मास में शनिदेव की पूजा बहुत जरूरी 
(Worship of Shani Dev is very important in the shravan month)

शनि के प्रभावों से हर कोई बचना चाहता है। शनि के कुप्रभावों से बचने के लिए हर कोई कुछ उपाय करता है, ताकि शनि से होने वाली समस्याओं से बचा जा सके। व्यक्ति पर शनि की साढ़े साती और शनि ढैय्या का बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में अगर शनि के कुप्रभावों से खुद तो बचाए रखना चाहते हैं, तो श्रावण का महीना इसके लिए बेहद खास है। सावन का मास भगवान शिव को समर्पित है। इस मास में की गई भोले की आराधना का फल बहुत जल्द मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार शनिदेव भगवान शिव के शिष्य हैं, ऐसे में शिव भक्तों पर शनि अपनी कुदृष्टि नहीं डालते और वे शनिदशा के दौरान भी शनि प्रकोप से बच जाते हैं। सावन मास में भगवान शिव का चालीसा करने मात्र से ही शिव जी प्रसन्न होते हैं और शनिदेव की बुरे प्रभावों से बचा जा सकता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार शनिदेव दंडाधिकारी है। माना जाता है कि न्याय करते वक्त शनिदेव किसी से न तो प्रभावित होते हैं और न ही किसी से डरते हैं। शनिदेव निष्पक्ष होकर न्याय करते हैं। वो सभी को कर्मों के आधार पर न्याय करते हैं और दंड देते हैं। भगवान शिव जो समस्त संसार के लिए पूजनीय हैं और देवों के देव महादेव हैं, उन्होंने शनिदेव को अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया अर्थात भगवान भोलेनाथ शनिदेव के गुरु हैं। इसलिए कहा जाता है कि शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए क्योंकि यदि गुरु प्रसन्न हैं तो शिष्य भी प्रसन्न होंगे। श्रावण के महीने का सिर्फ भगवान शिव ही नहीं बल्कि शनिदेव के साथ भी गहरा संबंध है। यदि शनिदेव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो श्रावण के महीने में उनकी भी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। ऐसा करने से शीघ्र ही भगवान शनिदेव को प्रसन्न कर सकते। सिंदूर का लेप करते समय इस मंत्र उच्चारण करें

श्रावण के प्रत्येक शनिवार को शनि संपत व्रत रखा जाता है। इस व्रत के फलस्वरूप शनिदेव का प्रकोप शांत होता है और जन्म कुंडली में शनिदेव द्वारा जनित दोषों का शमन होता है। श्रावण के प्रत्येक शनिवार को संपत शनिवार कहा जाता है यही वजह है कि इस व्रत को रखने से ना केवल उत्तम आरोग्य की प्राप्ति होती है बल्कि धन-संपत्ति की प्रबलता भी मिलती है। शनि देव वायु तत्व पर अपना आधिपत्य रखते हैं, इसलिए शनि देव की कृपा से वातावरण में वायु तत्व की भी वृद्धि हो जाती है और पारिस्थितिक संतुलन बनने से सभी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

शिव चालीसा (Shiv Chalisa)

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला।।

कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ।।

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा।।

किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी।।

तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ।।

आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा।।

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई।।

किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी।।

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं।।

वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई।।

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला।।

कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई।।

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा।।

सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी।।

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई।।

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर।।

जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी।।

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै।।

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो।।

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट ते मोहि आन उबारो।।

मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई।।

स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी।।

धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं।।

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी।।

शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन।।

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं।।

नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय।।

जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई।।

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी।।

पुत्र होन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई।।

पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे।।

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा।।

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे।।

जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे।।

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी।।

भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के।।

अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए।।

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे।।

मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी।।

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी।।

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे।।

समस्त समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए (To get rid of all problems)

    click here » शिव की पूजा से काल का भय कैसे?
    click here » हर दुखों का निवारण-पवित्र श्रावण मास

    भगवान शिव के अवतार (Bhagwan Shiv Ke Avatars)

    click here » भगवान शिव का नंदी अवतार 
    click here » भगवान शिव का गृहपति अवतार 
    click here » भगवान शिव का शरभ अवतार
    click here » भगवान शिव का वृषभ अवतार
    click here » भगवान शिव का कृष्णदर्शन अवतार
    click here » भगवान शिव का भिक्षुवर्य अवतार
    click here » भगवान शिव का पिप्पलाद अवतार
    click here » भगवान शिव का यतिनाथ अवतार
    click here » भगवान शिव का अवधूत अवतार 
    click here » भगवान शिव के अंश ऋषि दुर्वासा
    click here » भगवान शिव का सुरेश्वर अवतार
    click here » शिव का रौद्र अवतार-वीरभद्र
    click here » भगवान शिव का किरात अवतार 

    No comments