दरिद्रता माता लक्ष्मी की बहन- Maa Lakshmi Ki Bahan Daridrata

Share:
दरिद्रा माता लक्ष्मी की बहन in hindi, पौराणिक कथा in hindi, माँ लक्ष्मी के परिवार में उनकी एक बड़ी बहन भी है in hindi, इस संबंध में एक पौराणिक कथा है in hindi, कि इन दोनों बहनों के पास रहने का कोई निश्चित स्थान नहीं था in hindi, इसलिए एक बार माँ लक्ष्मी in hindi, और उनकी बड़ी बहन दरिद्रा श्री विष्णु के पास गई in hindi, और उनसे बोली जगत के पालनहार कृपया in hindi, हमें रहने का स्थान दो? In hindi, पीपल को विष्णु भगवान से वरदान प्राप्त था in hindi, कि जो व्यक्ति शनिवार को पीपल की पूजा करेगा in hindi, उसके घर का ऐश्वर्य कभी नष्ट नहीं होगा in hindi, अतः श्री विष्णु ने कहा in hindi, आप दोनों पीपल के वृक्ष पर वास करो in hindi, इस तरह वे दोनों बहनें पीपल के वृक्ष में रहने लगी in hindi, जब विष्णु भगवान ने माँ लक्ष्मी से विवाह करना चाहा in hindi, तो लक्ष्मी माता ने इंकार कर दिया in hindi,  क्योंकि उनकी बड़ी बहन दरिद्रा का विवाह नहीं हुआ था in hindi,  उनके विवाह के उपरांत ही वह श्री विष्णु से विवाह कर सकती थी in hindi, अतः उन्होंने दरिद्रा से पूछा-कैसा वर पाना चाहती हो in hindi, वह बोली ऐसा पति चाहती हूँ in hindi, जो कभी पूजा-पाठ न करे in hindi, व उसे ऐसे स्थान पर रखे जहाँ कोई भी पूजा-पाठ न करता हो in hindi, श्री विष्णु ने उनके लिए दुःसह ऋषि नामक वर चुना और दोनों विवाह सूत्र में बंध गए in hindi, भूल से भी न करें रविवार को पीपल-पूजा  in hindi, Don't even make a mistake the worship of Peepal on Sunday in hindi, दरिद्रा की शर्तानुसार उन दोनों को ऐसे स्थान पर वास करना था in hindi, जहाँ कोई भी धर्म कार्य न होता हो in hindi, ऋषि उसके लिए उसके लिए स्थान ढूंढने निकल पड़े लेकिन उन्हें कहीं पर भी ऐसा स्थान न मिला in hindi, दरिद्रा उनके इंतजार में विलाप करने लगी in hindi, श्री विष्णु ने पुनः लक्ष्मी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा in hindi, तो लक्ष्मी जी बोली- जब तक मेरी बहन की गृहस्थी नही बसती in hindi, मैं विवाह नही करूँगी in hindi, धरती पर ऐसा कोई स्थान नही है in hindi, जहाँ पर कोई धर्म कार्य न होता हो in hindi, उन्होंने अपने निवास स्थान पीपल को रविवार के लिए दरिद्रा व उसके पति को दे दिया in hindi,  इसलिए हर रविवार पीपल के नीचे देवताओं का वास न होकर दरिद्रा का वास होता है in hindi, अतः इस दिन पीपल की पूजा वर्जित मानी जाती है in hindi, पीपल को विष्णु भगवान से वरदान प्राप्त है in hindi, कि जो व्यक्ति शनिवार को पीपल की पूजा करेगा उस पर लक्ष्मी की अपार कृपा रहेगी in hindi, क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् in hindi, अभूतिमसमृद्धिं च, सर्वां निर्णुद मे गृहात्।। in hindi, ततो ज्येष्ठा समुत्पन्ना काषायाम्बरधारिणी in hindi, पिंगकेशा रक्तनेत्रा कूष्माण्डसदृशस्तनी।। in hindi, अतिवृद्धा दन्तहीना ललज्जिह्वा घटोदरी। in hindi,यां दृष्ट्वैव च लोकोऽयं समुद्विग्नरू प्रजायते in hindi, क्षीरोदतनया, पद्मा लक्ष्मी या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी in hindi, गम्भीरावर्तनाभिस्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया in hindi, या क्ष्मीर्दिव्यरूपैर्मणिगणखचितैरू स्नापिता हेमकुम्भैः in hindi, सा नित्यं पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमांगल्ययुक्ता in hindi, देवि! मेरे घर से सब प्रकार के दारिद्रय और अमंगल को दूर करो in hindi, जगत पालनकत्र्ता भगवान विष्णु ने जगत को दो प्रकार का बनाया है in hindi, भगवान विष्णु ने ब्राह्मणों, वेदों, सनातन वैदिक धर्म, श्री तथा पद्मा लक्ष्मी की उत्पत्ति करके एक भाग किया in hindi, और अशुभ ज्येष्ठा अलक्ष्मी, वेद विरोधी अधम मनुष्यों तथा अधर्म का निर्माण करके दूसरा भाग बनाया in hindi, श्रीलिंगमहापुराण के अनुसार समुद्र मंथन में महाभयंकर विष निकलने के बाद ज्येष्ठा अशुभ लक्ष्मी उत्पन्न हुईं  in hindi, फिर विष्णुपत्नी पद्मा लक्ष्मी प्रकट हुईं in hindi, लक्ष्मीजी से पहले प्रादुर्भूत होने के कारण अलक्ष्मी ज्येष्ठा कही गयी in hindi, अलक्ष्मी (दरिद्रा, ज्येष्ठादेवी) समुद्रमंथन से काषायवस्त्रधारिणी, पिंगल केशवाली, लाल नेत्रों वाली कूष्माण्ड के समान स्तनवाली, अत्यन्त बूढ़ी दन्तहीन तथा चंचल जिह्वा को बाहर निकाले हुए, घट के समान पेट वाली एक ऐसी ज्येष्ठा नाम वाली देवी उत्पन्न हुईं। जिन्हें देखकर सारा संसार घबरा गया। तिरछे नेत्रों वाली सुन्दरता की खान, पतली कमर वाली, सुवर्ण के समान रंग वाली, क्षीरसमुद्र के समान श्वेत साड़ी पहने हुए तथा दोनों हाथों में कमल की माला लिए और खिले हुए कमल के आसन पर विराजमान, भगवान की नित्य शक्ति लक्ष्मी उत्पन्न हुईं। उनके सौन्दर्य, औदार्य, यौवन, रूप-रंग और महिमा देखकर देवता और दैत्य दोनों ही मोहित हो गए। नमः कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नमः।  in hindi, कृष्णप्रियायै सततं महालक्ष्म्यै नमो नमः in hindi, पद्मपत्रेक्षणायै च पद्मास्यायै नमो नमः in hindi,  पद्मासनायै पद्मिन्यै वैष्णव्यै च नमो नमः in hindi, क्यों सक्षमबनो इन हिन्दी में, क्यों सक्षमबनो अच्छा लगता है इन हिन्दी में?, कैसे सक्षमबनो इन हिन्दी में? सक्षमबनो ब्रांड से कैसे संपर्क करें इन हिन्दी में, सक्षमबनो हिन्दी में, सक्षमबनो इन हिन्दी में, सब सक्षमबनो हिन्दी में,अपने को सक्षमबनो हिन्दीं में, सक्षमबनो कर्तव्य हिन्दी में, सक्षमबनो भारत हिन्दी में, सक्षमबनो देश के लिए हिन्दी में,खुद सक्षमबनो हिन्दी में, पहले खुद सक्षमबनो हिन्दी में, एक कदम सक्षमबनो के ओर हिन्दी में, आज से ही सक्षमबनो हिन्दी हिन्दी में,सक्षमबनो के उपाय हिन्दी में, अपनों को भी सक्षमबनो का रास्ता दिखाओं हिन्दी में, सक्षमबनो का ज्ञान पाप्त करों हिन्दी में,सक्षमबनो-सक्षमबनो हिन्दी में, सक्षमबनो इन हिन्दी में, सक्षमबनो इन हिन्दी में, sakshambano ka matlab in hindi, sakshambano in hindi, sakshambano in eglish, sakshambano meaning in hindi, sakshambano in hindi, sakshambano ka matlab in hindi, sakshambano photo, sakshambano photo in hindi, sakshambano image in hindi, sakshambano image, sakshambano jpeg, sakshambano site in hindi, sakshambano wibsite in hindi, sakshambano website, sakshambano india in hindi, sakshambano desh in hindi, sakshambano ka mission hin hindi, sakshambano ka lakshya kya hai,  sakshambano ki pahchan in hindi,  sakshambano brand in hindi,  sakshambano company in hindi,  sakshambano author in hindi,  sakshambano kiska hai hindi,srishti ki utpatti kaise hui thi in hindi, srishti ka nirman kisne kiya in hindi, बहन in hindi, Maa Lakshmi Ki Bahan Daridrata in hindi, Maa Lakshmi Ki Bahan Daridrata ke barein mein in hindi, Maa Lakshmi Ki Bahan Daridrata ki katha in hindi, Maa Lakshmi Ki Bahan Daridrata kaun hai hindi, Maa Lakshmi Ki Bahan Daridrata kay karti hai in hindi,


 दरिद्रता माता लक्ष्मी की बहन
पौराणिक कथा

माँ लक्ष्मी के परिवार में उनकी एक बड़ी बहन भी है इस संबंध में एक पौराणिक कथा है कि इन दोनों बहनों के पास रहने का कोई निश्चित स्थान नहीं था। इसलिए एक बार माँ लक्ष्मी और उनकी बड़ी बहन दरिद्रा श्री विष्णु के पास गई और उनसे बोली जगत के पालनहार कृपया हमें रहने का स्थान दो? पीपल को विष्णु भगवान से वरदान प्राप्त था कि जो व्यक्ति शनिवार को पीपल की पूजा करेगा उसके घर का ऐश्वर्य कभी नष्ट नहीं होगा अतः श्री विष्णु ने कहा आप दोनों पीपल के वृक्ष पर वास करो। इस तरह वे दोनों बहनें पीपल के वृक्ष में रहने लगी। जब विष्णु भगवान ने माँ लक्ष्मी से विवाह करना चाहा तो लक्ष्मी माता ने इंकार कर दिया। क्योंकि उनकी बड़ी बहन दरिद्रा का विवाह नहीं हुआ था। उनके विवाह के उपरांत ही वह श्री विष्णु से विवाह कर सकती थी। अतः उन्होंने दरिद्रा से पूछा-कैसा वर पाना चाहती हो वह बोली ऐसा पति चाहती हूँ जो कभी पूजा-पाठ न करे व उसे ऐसे स्थान पर रखे जहाँ कोई भी पूजा-पाठ न करता हो। श्री विष्णु ने उनके लिए दुःसह ऋषि नामक वर चुना और दोनों विवाह सूत्र में बंध गए।
भूल से भी न करें रविवार को पीपल-पूजा
(Don't even make a mistake the worship of Peepal on Sunday)

दरिद्रा की शर्तानुसार उन दोनों को ऐसे स्थान पर वास करना था जहाँ कोई भी धर्म कार्य न होता हो। ऋषि उसके लिए उसके लिए स्थान ढूंढने निकल पड़े लेकिन उन्हें कहीं पर भी ऐसा स्थान न मिला। दरिद्रा उनके इंतजार में विलाप करने लगी। श्री विष्णु ने पुनः लक्ष्मी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा तो लक्ष्मी जी बोली- जब तक मेरी बहन की गृहस्थी नही बसती मैं विवाह नही करूँगी। धरती पर ऐसा कोई स्थान नही है। जहाँ पर कोई धर्म कार्य न होता हो। उन्होंने अपने निवास स्थान पीपल को रविवार के लिए दरिद्रा व उसके पति को दे दिया। इसलिए हर रविवार पीपल के नीचे देवताओं का वास न होकर दरिद्रा का वास होता है। अतः इस दिन पीपल की पूजा वर्जित मानी जाती है। पीपल को विष्णु भगवान से वरदान प्राप्त है कि जो व्यक्ति शनिवार को पीपल की पूजा करेगा उस पर लक्ष्मी की अपार कृपा रहेगी।

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च, सर्वां निर्णुद मे गृहात्।।
ततो ज्येष्ठा समुत्पन्ना काषायाम्बरधारिणी।
पिंगकेशा रक्तनेत्रा कूष्माण्डसदृशस्तनी।।
अतिवृद्धा दन्तहीना ललज्जिह्वा घटोदरी।
यां दृष्ट्वैव च लोकोऽयं समुद्विग्नरू प्रजायते।।
क्षीरोदतनया, पद्मा लक्ष्मी 
या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी।
गम्भीरावर्तनाभिस्तनभरनमिता शुभ्रवस्त्रोत्तरीया।।
या लक्ष्मीर्दिव्यरूपैर्मणिगणखचितैरू स्नापिता हेमकुम्भैः।
सा नित्यं पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमांगल्ययुक्ता।।


देवि! मेरे घर से सब प्रकार के दारिद्रय और अमंगल को दूर करो। जगत पालनकत्र्ता भगवान विष्णु ने जगत को दो प्रकार का बनाया है। भगवान विष्णु ने ब्राह्मणों, वेदों, सनातन वैदिक धर्म, श्री तथा पद्मा लक्ष्मी की उत्पत्ति करके एक भाग किया और अशुभ ज्येष्ठा अलक्ष्मी, वेद विरोधी अधम मनुष्यों तथा अधर्म का निर्माण करके दूसरा भाग बनाया। श्रीलिंगमहापुराण के अनुसार समुद्र मंथन में महाभयंकर विष निकलने के बाद ज्येष्ठा अशुभ लक्ष्मी उत्पन्न हुईं फिर विष्णुपत्नी पद्मा लक्ष्मी प्रकट हुईं। लक्ष्मीजी से पहले प्रादुर्भूत होने के कारण अलक्ष्मी ज्येष्ठा कही गयी। अलक्ष्मी (दरिद्रा, ज्येष्ठादेवी) समुद्रमंथन से काषायवस्त्रधारिणी, पिंगल केशवाली, लाल नेत्रों वाली कूष्माण्ड के समान स्तनवाली, अत्यन्त बूढ़ी दन्तहीन तथा चंचल जिह्वा को बाहर निकाले हुए, घट के समान पेट वाली एक ऐसी ज्येष्ठा नाम वाली देवी उत्पन्न हुईं। जिन्हें देखकर सारा संसार घबरा गया। तिरछे नेत्रों वाली सुन्दरता की खान, पतली कमर वाली, सुवर्ण के समान रंग वाली, क्षीरसमुद्र के समान श्वेत साड़ी पहने हुए तथा दोनों हाथों में कमल की माला लिए और खिले हुए कमल के आसन पर विराजमान, भगवान की नित्य शक्ति लक्ष्मी उत्पन्न हुईं। उनके सौन्दर्य, औदार्य, यौवन, रूप-रंग और महिमा देखकर देवता और दैत्य दोनों ही मोहित हो गए।

नमः कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नमः।
कृष्णप्रियायै सततं महालक्ष्म्यै नमो नमः।।
पद्मपत्रेक्षणायै च पद्मास्यायै नमो नमः।
पद्मासनायै पद्मिन्यै वैष्णव्यै च नमो नमः।।