माता लक्ष्मी ने बताया अहम रहस्य - Mata Lakshmi ne bataya mahatvapurn rahasya

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  Mata Lakshmi ne bataya mahatvapurn rahasya  
माता लक्ष्मी ने बताया अहम रहस्य
(Mata Lakshmi told an important secret)

पुराणों के अनुसार माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु की कृपा पाना अत्यन्त अवश्यक होता है क्योंकि लक्ष्मी उन्हीं के चरणों में रहकर उनकी दासी बनना पसंद करती हैं। माता लक्ष्मी सदैव श्रीहरि विष्णु के चरणों में बैठी उनके चरण दबाती ही दिखाई देती है। एक बार नारद जी ने माता लक्ष्मी से कहा आप सदैव श्रीहरि विष्णु के चरण कमल को दबाती ही दिखाई देती हो? माता लक्ष्मी ने बड़ी ही सहजता से नारद मुनि को बताया कि मनुष्य से लेकर देव तक सभी को ग्रह अच्छी या बुरी तरह प्रभावित करते हैं। उनके श्री हरि के पैर दबाने से इन ग्रहों का बुरा प्रभाव खत्म होता है। इसलिए वो अपने श्री हरि के पैर दबाती हैं। स्त्री के हाथ में देवताओं के परम गुरु बृहस्पति निवास करते हैं। वहीं पुरुषों के पैरों में दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य का वास होता है। ऐसे में जब पत्नी अपने पति के पैर दबाती है तो ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचने के साथ-साथ धन का योग भी बनता है। 

भगवान विष्णु ने उन्हें अपने पुरुषार्थ के बल पर ही वश में कर रखा है। लक्ष्मी उन्हीं के वश में रहती है जो हमेशा सभी के कल्याण का भाव रखता हैं। विष्णु के पास जो लक्ष्मी हैं वह धन और सम्पत्ति है। भगवान श्री हरि उसका उचित उपयोग जानते हैं। इसी वजह से महालक्ष्मी श्री विष्णु के पैरों में उनकी दासी बन कर रहती हैं। पौराणिक कथा अनुसार अलक्ष्मी, माता लक्ष्मी की बड़ी बहन हैं। बेहद कुरूप होने की वजह से उनका विवाह भी नहीं हो पाया। कहा जाता है कि जहाँ-जहाँ माता लक्ष्मी जाती हैं, अलक्ष्मी उनके पीछे-पीछे वहीं पहुँच जाती हैं। कभी अपने स्वरूप में तो कभी देवी लक्ष्मी की सवारी उल्लू के स्वरूप में, अलक्ष्मी अपनी बहन लक्ष्मी के प्रति हमेशा द्वेष की भावना रखती है। 

रंग-रूप में वह बिल्कुल भी आकर्षक नही है जब भी माता लक्ष्मी श्रीहरि विष्णु के साथ होती है अलक्ष्मी भी वहाँ पहुँच जाती है। इस तरह का व्यवहार देखकर माता लक्ष्मी को अच्छा नही लगा इसलिए उन्होंने अलक्ष्मी को श्राप दिया- मृत्यु के देवता तुम्हारे पति हो और जहांँ गंदगी, द्वेष, लालच, आलस, रोष होगा वही तुम्हारा वास होगा। इसिलए मााता लक्ष्मी श्रीहरि विष्णु के चरणों के पास बैठकर उनके चरणों की गंदगी को दूर करती है कई अलक्ष्मी उनके समीप न आ सके। पुराणों के अनुसार आज भी माना जाता है सौभाग्य और दुर्भाग्य एक साथ चलते हैं। 

जब आपके ऊपर सौभाग्य की वर्षा होती है, तब दुर्भाग्य वहीं पास में खड़ा अपने लिए मौका तलाशता है। अलक्ष्मी भी कुछ इसी तरह घर के बाहर बैठकर लक्ष्मी के जाने का इंतजार करती हैं। जहाँ भी गंदगी मौजूद होती है वहाँ लालच, द्वेष, पति-पत्नी के झगड़े, अश्लीलता, कलह-क्लेश का वातावरण बन जाता है। यह घर में अलक्ष्मी की मौजूदगी है। अलक्ष्मी को दूर रखने और लक्ष्मी को आमंत्रित करने के लिए हिन्दू धर्म से जुड़े प्रत्येक घर में सफाई के साथ-साथ नित्य पूजा-पाठ किया जाता है।



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