रूद्र अवतार हनुमान - Rudra Avatar Hanuman

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यह खीर राजा की तीनों रानियों को खिला दो in hindi, राजा की इच्छा अवश्य पूर्ण होगी in hindi,  जिसे तीनों रानियों को खिलाना था in hindi, लेकिन इस दौरान एक पक्षी उस खीर की कटोरी में थोड़ा सा खीर अपने पंजों में फंसाकर ले गया  in hindi, और तपस्या में लीन अंजना के हाथ में गिरा दिया in hindi, अंजना ने शिव का प्रसाद समझकर उसे ग्रहण कर लिया in hindi, व्यास जी राजा परीक्षित से कहते है in hindi, एक समय सृष्टि से जल तत्व अदृश्य हो गया in hindi, सृष्टि में त्राहि-त्राहि मच गयी और जीवन का अंत होने लगा  in hindi, तब ब्रहमा, विष्णु  और ऋषि गण मिलकर भगवान शिव के शरण में गए और शिव जी से प्रार्थना की in hindi, और बोले नाथों के नाथ आदिनाथ अब इस समस्या का समाधान करें in hindi, श्रृष्टि में पुनः जल तत्व कैसे आयेगा in hindi, देवों की विनती सुन कर भोलेनाथ ने ग्यारहा रुद्रों को बुलाकर पूछा  in hindi, आप में से कोई ऐसा है जो सृष्टि को पुनः जल तत्व प्रदान कर सके in hindi, दस रूदों ने इनकार कर दिया in hindi, ग्यारहवाँ रुद्र जिसका नाम हर था  in hindi, उसने कहा मेरे करतल में जल तत्व का पूर्ण निवास है in hindi, मैं श्रृष्टि को पुनः जल तत्व प्रदान करूँगा in hindi, लेकिन इसके लिए मूझे अपना शरीर गलाना पडेगा in hindi, और शरीर गलने के बाद इस श्रृष्टि से मेरा नामो निशान मिट जायेगा in hindi, भगवान शिव ने हर रूपी रूद्र को वरदान दिया in hindi, और कहा इस रूद्र रूपी शरीर के गलने के बाद तुम्हे नया शरीर और नया नाम प्राप्त होगा in hindi, और मैं सम्पूर्ण रूप से तुम्हारे उस नये तन में निवास करूंगा in hindi, जो श्रृष्टि के कल्याण हेतू होगा in hindi, हर नामक रूद्र ने अपने शरीर को गलाकर श्रृष्टि को जल तत्व प्रदान किया in hindi, और उसी जल से एक महाबली वानर की उत्पत्ति हुई in hindi, जिसे हम महावीर हनुमान के नाम से जानते है in hindi, कैसे बने महावीर हनुमान in hindi, महावीर हनुमान के पिता केसरी सुमेरु पर्वत पर राज्य करते थे in hindi, एक दिन माता अंजना फल लाने के लिये आश्रम से दूर चली गईं in hindi, जब शिशु हनुमान को भूख लगी  in hindi, तो वे उगते हुये सूर्य को फल समझकर उसे पकड़ने के लिये आकाश में उड़ने लगे in hindi,  उनकी सहायता के लिये पवन देव भी बहुत तेजी से चले in hindi, उधर भगवान सूर्य ने उन्हें अबोध शिशु समझकर अपने तेज से नही जलने दिया in hindi,  जिस समय हनुमान सूर्य को पकड़ने के लिये लपके उसी समय राहू सूर्य पर ग्रहण लगाना चाहता था in hindi, हनुमानजी ने सूर्य के ऊपरी भाग में जब स्पर्श किया तो राहू भयभीत होकर वहाँ से भाग गया in hindi, उसने इन्द्र के पास जाकर शिकायत की कि देवराज! In hindi, आपने मुझे अपनी क्षुधा शान्त करने के साधन के रूप में सूर्य और चन्द्र दिये थे in hindi,  आज जब अमावस्या के दिन मैं सूर्य को ग्रस्त करने के लिये गया  in hindi, तो मैंने देखा कि एक दूसरा राहू सूर्य को पकड़ने जा रहा है in hindi, राहू की बात सुनकर इन्द्र घबरा गये और राहू को साथ लेकर सूर्य की ओर चल पड़े in hindi, राहू को देखकर हनुमान जी सूर्य को छोड़कर राहू पर झपटे in hindi, राहू ने इन्द्र को रक्षा के लिये पुकारा तो उन्होंने हनुमान जी के ऊपर वज्र का प्रहार किया  in hindi, जिससे वे एक पर्वत पर जा गिरे और उनकी बायीं ठुड्डी टूट गई in hindi, हनुमान की यह दशा देखकर वायुदेव को क्रोध आया in hindi, उन्होंने उसी क्षण अपनी गति रोक ली in hindi, इससे कोई भी प्राणी साँस न ले सका  in hindi, और सब पीड़ा से तड़पने लगे in hindi,  तब सारे सुर, असुर, यक्ष, किन्नर आदि ब्रह्मा जी की शरण में गये in hindi, ब्रह्मा उन सबको लेकर वायुदेव के पास गये in hindi, वे मृत हनुमान को गोद में लिये उदास बैठे थे in hindi,  ब्रह्मा जी ने उन्हें जीवित कर दिया in hindi, और वायुदेव ने अपनी गति का संचार करके सब प्राणियों की पीड़ा दूर की in hindi, चूँकि इन्द्र के वज्र से हनुमान जी की हनु टूट गई थी in hindi, इसलिये तब से उनका नाम हनुमान हो गया in hindi, सूर्य देव ने हनुमान को अपने तेज दिया in hindi, वरुण, यम, कुबेर, विश्वकर्मा आदि ने उन्हें अजेय पराक्रमी in hindi, अवध्य होने के साथ-साथ नाना प्रकार के रूप धारण करने की क्षमता  in hindi, आदि के वर दिये in hindi,  इस प्रकार कई शक्तियों से सम्पन्न हो जाने पर निर्भय होकर वे ऋषि-मुनियों के साथ शरारत करने लगे in hindi, किसी के वल्कल फाड़ देते किसी की कोई वस्तु नष्ट कर देते in hindi,  इससे क्रुद्ध होकर ऋषियों ने इन्हें शाप दिया in hindi, कि तुम अपने बल और शक्ति को भूल जाओगे in hindi, किसी के याद दिलाने पर ही तुम्हें अपनी शक्तियों का ज्ञान होगा in hindi, तब से उन्हें अपने बल और शक्ति का स्मरण नहीं रहता in hindi, हनुमान भक्ति की शक्ति in hindi, मारुतिनंदन को चोला चढ़ाने से जहाँ सकारात्मक ऊर्जा मिलती है in hindi, वही बाधाओं से मुक्ति भी मिलती है in hindi,  पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए शनि को शांत करना चाहिए in hindi,  जब हनुमानजी ने शनिदेव का घमंड तोड़ा था in hindi, तब सूर्यपुत्र शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया in hindi, कि उनकी भक्ति करने वालों की राशि पर आकर भी वे कभी उन्हें पीड़ा नहीं देंगे in hindi,  हनुमानजी का शुमार अष्टचिरंजीवी में किया जाता है in hindi, यानी वे अजर-अमर देवता हैं in hindi, उन्होंने मृत्यु को प्राप्त नही किया in hindi,  बजरंगबली की उपासना करने वाला भक्त कभी पराजित नही होते in hindi, हनुमानजी का जन्म सूर्योदय के समय बताया गया है  in hindi, इसलिए इसी काल में उनकी पूजा-अर्चना और आरती का विधान है in hindi, मेघनाद की भूल से हनुमान जी स्वयं ही ब्रह्मास्त्र के प्रभाव से छुटकारा पा गए in hindi, माता सीता जी का आशीर्वाद पाकर हनुमान जी को बड़ी खुशी हुई in hindi, उनसे बातचीत करते हुए उनकी दृष्टि अशोक वाटिका में लगे हुए सुन्दर-सुन्दर फलवाले वृक्षों पर गई उन फलों को देखते ही उनकी भूख जागृत हो गई  in hindi, तब उन्होंने माता सीता जी से उन फलों को खाकर अपनी भूख मिटाने के लिए आज्ञा माँगी in hindi, उनकी बात सुनकर सीता माता ने कहा तात हनुमान! In hindi, इस वाटिका की रक्षा में बड़े-बड़े बलवान राक्षस लगे हुए है in hindi, फल खाने के प्रयत्न में उनके द्वारा तुम्हारी हानि हो सकती है in hindi, हनुमान जी बोले माता मुझे उनका कोई भय नही है in hindi, केवल आप मुझे आज्ञा दीजिए in hindi, माता सीता ने कहा ठीक है पुत्र तुम भगवान श्रीराम चंद्र जी का स्मरण करके इन मीठे फलों को खा सकते हो in hindi, माता की आज्ञा लेकर महावीर हनुमान निर्भय होकर अशोक वाटिका में पहुँच गए in hindi, और खूब जी भरकर फल खाए in hindi, पेड़ों को भी उखाड़-उखाड़ कर तोड़-तोड़ कर फैंकने लगे in hindi,  वहाँ बहुत से बलवान राक्षस रखवाली कर रहे थे in hindi, उनमें से कुछ हनुमान जी के द्वारा मारे गए in hindi, और कुछ ने भाग कर रावण को बताया in hindi, कि अशोक वाटिका में एक बहुत बड़ा बंदर आया है in hindi, उसने फल भी खाए है और पेड़ों को उखाड़ फेंक रहा है in hindi, रावण ने यह समाचार सुनते ही अपने बड़े-बड़े बलवान योद्धाओं को वहाँ भेजा in hindi, लेकिन हनुमान जी ने उन्हें मार गिराया in hindi, अब रावण ने अपने महापराक्रमी पुत्र अक्षय कुमार भेजा in hindi, परन्तु वह मारा गया in hindi, अब रावण ने अपने बलशाली पुत्र मेघनाद को  वहाँ भेजा in hindi, और रावण ने उससे कहा उस बंदर को जान से मत मारना in hindi, बांधकर ले आना। मैं उस बलशाली बन्दर को देखना चाहता हूँ in hindi, मेघनाद अपने योद्धाओं के साथ अशोक वाटिका पहुँचा महावीर हनुमान ने मेघनाद के रथ को घोड़ों सहित चकनाचूर कर दिया in hindi,  इसके बाद हनुमान जी ने मेघनाद की छाती में प्रहार किया in hindi, जिसके कारण मेघनाद थोड़ी देर के लिए मूर्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा in hindi,  इसके बाद उसने अपनी माया का प्रयोग किया जिसका महावीर हनुमान पर कोई प्रभाव नही पड़ा in hindi,  अब उसने ब्रह्मा जी का दिया हुआ अचूक अस्त्र ब्रह्मास्त्र हनुमान जी पर चलाया in hindi,  हनुमान जी ने सोचा यदि मैं इस ब्रह्मास्त्र का अपने ऊपर कोई प्रभाव नही पडने देता in hindi, तो इसका अपमान होगा in hindi, और संसार में इसकी महिमा घट जाएगी in hindi,  अतः ब्रह्मास्त्र की चोट लगते ही वह जान-बूझकर बेहोश होकर पृथ्वी पर गिर पड़े in hindi,  मेघनाद ने उन्हें नागपाश में बांध लिया in hindi, और यही उससे भूल हुई in hindi,  ब्रह्मास्त्र एक ऐसा अस्त्र है in hindi, कि यदि उसके ऊपर किसी दूसरे अस्त्र-शस्त्र  का प्रयोग कर दिया जाए in hindi, तो उसका प्रभाव अपने आप समाप्त हो जाता है in hindi,  इस प्रकार मेघनाद की भूल से हनुमान जी स्वयं ही ब्रह्मास्त्र के प्रभाव से छुटकारा पा गए in hindi, उन्हें उसका प्रभाव नष्ट करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी in hindi, कैसे जन्मे मकरध्वज ? in hindi, रावण की आज्ञा अनुसार हनुमान की पूछँ पर आग लगाई गयी in hindi, तब महावीर हनुमान ने अपनी पूंछ की आग से पूरी लंका को जलाकर खाक कर दिया था in hindi,  लंका से लौटते समय जब हनुमान आग बुझाने नदी में उतरे तो गर्मी और आग की वजह से उन्हें बहुत पसीना आ रहा था in hindi, उनके पसीने की कुछ बूंदे एक मछली के मुँह में गिरी  in hindi, जिसने उनके पुत्र को जन्म दिया in hindi, उस समय अहिरावण पाताललोक में राज करता था in hindi,  उसके राज्य के लोगों को मछली काटने पर एक जीव मिला in hindi, उन्होंने उसे राजा को दे दिया in hindi, और नाम रखा मकरध्वज in hindi,  बड़ा होकर मकरध्वज बहुत ताकतवर हो गया in hindi, और अहिरावण ने उसे पाताल के द्वार पर खड़े होकर उसे रक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी in hindi, महावीर हनुमान ने पाताल लोक में अहिरावण का वध करके  in hindi, अपने पुत्र मकरध्वज को वहाँ के राज्य सिंहासन पर बैठाया in hindi,  मंगलवार व्रत in hindi, पुत्र की प्राप्ति के लिए मंगलवार का व्रत उत्तम माना जाता है in hindi, मंगलवार के दिन बन्दरों को गुड़, चने और केले खिलाने से हनुमान जी अधिक प्रसन्न होते है in hindi,  इससे भक्तों के कष्ट, रोग और पीड़ा आदि दुख दूर होते है in hindi, ऐसा करने से संकट दूर होते है in hindi, परिवार में सुख समृद्धि आती है in hindi, मंगलवार का व्रत करने पर गेहूं और गुड़ का ही भोजन करना चाहिए in hindi, भोजन दिन रात में एक बार ही ग्रहण करना चाहिए in hindi,  व्रत 21 हफ्ता तक रखना चाहिए in hindi,  इस व्रत से मनुष्य के सभी दोष नष्ट हो जाते है in hindi, हनुमान जयंती के दिन या किसी भी मंगलवार को सुबह उठकर स्नान करके 1 लोटा जल से हनुमानजी की मूर्ति को स्नान कराएं in hindi,  पहले मंगल वार को एक दाना साबुत उड़द का हनुमानजी के सिर पर रखकर 11 परिक्रमा करें  in hindi, और मन ही मन अपनी मनोकामना हनुमानजी को कहें  in hindi, औ फिर वह उड़द का दाना लेकर घर लौट आएं तथा उसे अलग रख दें in hindi, दूसरे मंगल वार को 1-1 उड़द का दाना रोज बढ़ाते रहें  in hindi,तथा लगातार यही प्रक्रिया करते रहें। 41 दिन 41 दाने रखने के बाद 42वें दिन से 1-1 दाना कम करते रहें in hindi, 81वें दिन का यह अनुष्ठान पूर्ण होने पर हनुमान जी मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद देते है in hindi, इस पूरी विधि के दौरान जितने भी उड़द के दाने आपने हनुमानजी को चढ़ाए है उन्हें नदी में प्रवाहित कर दें in hindi, व्रत व पूजन के समय लाल वस्त्र धरण करके हनुमान जी को लाल पुष्प अर्पित करें in hindi, हनुमान जी को नारियल, धूप, दीप, सिंदूर अर्पित करें in hindi, हनुमान अष्टमी के दिन हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें in hindi, राम रक्षा स्त्रोत in hindi, बजरंगबाण in hindi, हनुमान अष्टक का पाठ करें in hindi, हनुमान आरती in hindi, हनुमत स्तवन in hindi,  राम वन्दना in hindi, राम स्तुति in hindi, संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करें in hindi, हनुमान जी को चमेली का तेल in hindi, सिंदूर का चोला in hindi, गुड़-चने चढ़ाएं in hindi, आटे से निर्मित प्रसाद वितरित करें in hindi, मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान मंदिर में जाकर रामभक्त हनुमान का गुणगान करें in 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मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करने वाले को सभी संकटों से छुटकारा मिलता है  in hindi, और अनेक प्रकार से अच्छे परिणाम सामने आते हैं in hindi, इसके सस्वर पाठ से घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां यथा भूत-प्रेत, चुडैल, डायन आदि भी घर से चली जाती हैं in hindi, साथ ही घर के सदस्यों पर आए बड़े से बड़े संकटों सहज ही टल जाते हैं in hindi, इसके अलावा यदि जन्मकुंडली या गोचर में शनि, राहु, केतु या अन्य कोई दुष्ट ग्रह बुरा असर दे रहा है तो वह भी सहज ही टल जाता है in hindi, शनि की साढ़े साती व ढैय्या में इसका प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है in hindi, मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा को चमेली का तेल मिश्रित सिंदूर अर्पित करें in hindi, दीपक जलाने के बाद भगवान श्रीगणेश, शंकर-पार्वती, भगवान राम-सीता-लक्ष्मण तथा हनुमान जी को प्रणाम कर अपने गुरुदेव तथा पितृदेवों का स्मरण करें in hindi, तत्पश्चात हनुमानजी को मन-ही-मन ध्यान करते हुए सुंदरकांड का पाठ आरंभ करें in hindi, पूर्ण होने पर हनुमानजी की आरती करें in hindi, प्रसाद चढ़ाएं तथा वहां मौजूद सभी लोगों में बांटे in hindi, आपके सभी बिगड़े हुए काम तुंरत ही पूरे 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भगवान शिव से वरदान 
(Bhagwan Shiv Se Vardan in hindi)
  • माता अंजना ने नारायण पर्वत पर स्वामी तीर्थ के पास अपने आराध्य शिव को अपनी कठोर तपस्या से प्रसन्न किया। तब भगवान शिव ने उन्हें वरदान मागने को कहा माता अंजना ने भगवान शिव से कहा कि साधु के श्राप से मुक्ति पाने के लिए उन्हें शिव के अवतार को जन्म देना है इसलिए शिव बालक के रूप में उनकी कोख से जन्म लें। भगवान शिव तथास्तु कहकर अंतर्ध्यान हो गए। महाराज दशरथ अपनी तीन रानियों के साथ पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए श्रृंगी ऋषि को बुलाकर पुत्र कामेष्टिा यज्ञ कर रहे थे। यज्ञ की पूर्णाहुति पर स्वयं अग्नि देव ने प्रकट होकर श्रृंगी को खीर का एक स्वर्ण पात्र दिया और कहा ऋषिवर! यह खीर राजा की तीनों रानियों को खिला दो। राजा की इच्छा अवश्य पूर्ण होगी। जिसे तीनों रानियों को खिलाना था लेकिन इस दौरान एक पक्षी उस खीर की कटोरी में थोड़ा सा खीर अपने पंजों में फंसाकर ले गया और तपस्या में लीन अंजना के हाथ में गिरा दिया। अंजना ने शिव का प्रसाद समझकर उसे ग्रहण कर लिया।
व्यास जी राजा परीक्षित से कहते है 
(Vyas ji Raja Parikshat  se kahte hai)
  • एक समय सृष्टि से जल तत्व अदृश्य हो गया। सृष्टि में त्राहि-त्राहि मच गयी और जीवन का अंत होने लगा तब ब्रहमा, विष्णु  और ऋषि गण मिलकर भगवान शिव के शरण में गए और शिव जी से प्रार्थना की और बोले नाथों के नाथ आदिनाथ अब इस समस्या का समाधान करें। श्रृष्टि में पुनः जल तत्व कैसे आयेगा देवों की विनती सुन कर भोलेनाथ ने ग्यारहा रुद्रों को बुलाकर पूछा आप में से कोई ऐसा है जो सृष्टि को पुनः जल तत्व प्रदान कर सके। दस रूदों ने इनकार कर दिया। ग्यारहवाँ रुद्र जिसका नाम हर था उसने कहा मेरे करतल में जल तत्व का पूर्ण निवास है। मैं श्रृष्टि को पुनः जल तत्व प्रदान करूँगा लेकिन इसके लिए मूझे अपना शरीर गलाना पडेगा और शरीर गलने के बाद इस श्रृष्टि से मेरा नामो निशान मिट जायेगा। भगवान शिव ने हर रूपी रूद्र को वरदान दिया और कहा इस रूद्र रूपी शरीर के गलने के बाद तुम्हे नया शरीर और नया नाम प्राप्त होगा और मैं सम्पूर्ण रूप से तुम्हारे उस नये तन में निवास करूंगा जो श्रृष्टि के कल्याण हेतू होगा। हर नामक रूद्र ने अपने शरीर को गलाकर श्रृष्टि को जल तत्व प्रदान किया और उसी जल से एक महाबली वानर की उत्पत्ति हुई। जिसे हम महावीर हनुमान के नाम से जानते है।
कैसे बने महावीर हनुमान
(Kaise bane Mahaveer Hanuman)
  • महावीर हनुमान के पिता केसरी सुमेरु पर्वत पर राज्य करते थे। एक दिन माता अंजना फल लाने के लिये आश्रम से दूर चली गईं। जब शिशु हनुमान को भूख लगी तो वे उगते हुये सूर्य को फल समझकर उसे पकड़ने के लिये आकाश में उड़ने लगे। उनकी सहायता के लिये पवन देव भी बहुत तेजी से चले। उधर भगवान सूर्य ने उन्हें अबोध शिशु समझकर अपने तेज से नही जलने दिया। जिस समय हनुमान सूर्य को पकड़ने के लिये लपके उसी समय राहू सूर्य पर ग्रहण लगाना चाहता था। हनुमानजी ने सूर्य के ऊपरी भाग में जब स्पर्श किया तो राहू भयभीत होकर वहाँ से भाग गया। उसने इन्द्र के पास जाकर शिकायत की कि देवराज! आपने मुझे अपनी क्षुधा शान्त करने के साधन के रूप में सूर्य और चन्द्र दिये थे। आज जब अमावस्या के दिन मैं सूर्य को ग्रस्त करने के लिये गया तो मैंने देखा कि एक दूसरा राहू सूर्य को पकड़ने जा रहा है। राहू की बात सुनकर इन्द्र घबरा गये और राहू को साथ लेकर सूर्य की ओर चल पड़े। राहू को देखकर हनुमान जी सूर्य को छोड़कर राहू पर झपटे। राहू ने इन्द्र को रक्षा के लिये पुकारा तो उन्होंने हनुमान जी के ऊपर वज्र का प्रहार किया जिससे वे एक पर्वत पर जा गिरे और उनकी बायीं ठुड्डी टूट गई। हनुमान की यह दशा देखकर वायुदेव को क्रोध आया। उन्होंने उसी क्षण अपनी गति रोक ली। इससे कोई भी प्राणी साँस न ले सका और सब पीड़ा से तड़पने लगे। तब सारे सुर, असुर, यक्ष, किन्नर आदि ब्रह्मा जी की शरण में गये। ब्रह्मा उन सबको लेकर वायुदेव के पास गये। वे मृत हनुमान को गोद में लिये उदास बैठे थे। ब्रह्मा जी ने उन्हें जीवित कर दिया और वायुदेव ने अपनी गति का संचार करके सब प्राणियों की पीड़ा दूर की। चूँकि इन्द्र के वज्र से हनुमान जी की हनु टूट गई थी इसलिये तब से उनका नाम हनुमान हो गया। सूर्य देव ने हनुमान को अपने तेज दिया। वरुण, यम, कुबेर, विश्वकर्मा आदि ने उन्हें अजेय पराक्रमी, अवध्य होने के साथ-साथ नाना प्रकार के रूप धारण करने की क्षमता आदि के वर दिये। इस प्रकार कई शक्तियों से सम्पन्न हो जाने पर निर्भय होकर वे ऋषि-मुनियों के साथ शरारत करने लगे। किसी के वल्कल फाड़ देते किसी की कोई वस्तु नष्ट कर देते। इससे क्रुद्ध होकर ऋषियों ने इन्हें शाप दिया कि तुम अपने बल और शक्ति को भूल जाओगे। किसी के याद दिलाने पर ही तुम्हें अपनी शक्तियों का ज्ञान होगा। तब से उन्हें अपने बल और शक्ति का स्मरण नहीं रहता।
हनुमान भक्ति की शक्ति 
(Hanuman Bhakti ki shakti)
  • मारुतिनंदन को चोला चढ़ाने से जहाँ सकारात्मक ऊर्जा मिलती है वही बाधाओं से मुक्ति भी मिलती है। पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए शनि को शांत करना चाहिए। जब हनुमानजी ने शनिदेव का घमंड तोड़ा था तब सूर्यपुत्र शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया कि उनकी भक्ति करने वालों की राशि पर आकर भी वे कभी उन्हें पीड़ा नहीं देंगे। हनुमानजी का शुमार अष्टचिरंजीवी में किया जाता है, यानी वे अजर-अमर देवता हैं। उन्होंने मृत्यु को प्राप्त नही किया। बजरंगबली की उपासना करने वाला भक्त कभी पराजित नही होते। हनुमानजी का जन्म सूर्योदय के समय बताया गया है इसलिए इसी काल में उनकी पूजा-अर्चना और आरती का विधान है।
मेघनाद की भूल से हनुमान जी स्वयं ही ब्रह्मास्त्र के प्रभाव से छुटकारा मिल गया
(Hanuman Ji got redemption of Brahmastra by Meghnad mistake)
  • माता सीता जी का आशीर्वाद पाकर हनुमान जी को बड़ी खुशी हुई। उनसे बातचीत करते हुए उनकी दृष्टि अशोक वाटिका में लगे हुए सुन्दर-सुन्दर फलवाले वृक्षों पर गई उन फलों को देखते ही उनकी भूख जागृत हो गई तब उन्होंने माता सीता जी से उन फलों को खाकर अपनी भूख मिटाने के लिए आज्ञा माँगी। उनकी बात सुनकर सीता माता ने कहा तात हनुमान! इस वाटिका की रक्षा में बड़े-बड़े बलवान राक्षस लगे हुए है फल खाने के प्रयत्न में उनके द्वारा तुम्हारी हानि हो सकती है। हनुमान जी बोले माता मुझे उनका कोई भय नही है केवल आप मुझे आज्ञा दीजिए। माता सीता ने कहा ठीक है पुत्र तुम भगवान श्रीराम चंद्र जी का स्मरण करके इन मीठे फलों को खा सकते हो। माता की आज्ञा लेकर महावीर हनुमान निर्भय होकर अशोक वाटिका में पहुँच गए और खूब जी भरकर फल खाए। पेड़ों को भी उखाड़-उखाड़ कर तोड़-तोड़ कर फैंकने लगे। वहाँ बहुत से बलवान राक्षस रखवाली कर रहे थे। उनमें से कुछ हनुमान जी के द्वारा मारे गए और कुछ ने भाग कर रावण को बताया कि अशोक वाटिका में एक बहुत बड़ा बंदर आया है उसने फल भी खाए है और पेड़ों को उखाड़ फेंक रहा है। रावण ने यह समाचार सुनते ही अपने बड़े-बड़े बलवान योद्धाओं को वहाँ भेजा लेकिन हनुमान जी ने उन्हें मार गिराया। अब रावण ने अपने महापराक्रमी पुत्र अक्षय कुमार भेजा परन्तु वह मारा गया। अब रावण ने अपने बलशाली पुत्र मेघनाद कोे वहाँ भेजा और रावण ने उससे कहा उस बंदर को जान से मत मारना। बांधकर ले आना। मैं उस बलशाली बन्दर को देखना चाहता हूँ। मेघनाद अपने योद्धाओं के साथ अशोक वाटिका पहुँचा महावीर हनुमान ने मेघनाद के रथ को घोड़ों सहित चकनाचूर कर दिया। इसके बाद हनुमान जी ने मेघनाद की छाती में प्रहार किया जिसके कारण मेघनाद थोड़ी देर के लिए मूर्छित होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा। इसके बाद उसने अपनी माया का प्रयोग किया जिसका महावीर हनुमान पर कोई प्रभाव नही पड़ा। अब उसने ब्रह्मा जी का दिया हुआ अचूक अस्त्र ब्रह्मास्त्र हनुुमान जी पर चलाया। हनुमान जी ने सोचा यदि मैं इस ब्रह्मास्त्र का अपने ऊपर कोई प्रभाव नही पडने देता तो इसका अपमान होगा और संसार में इसकी महिमा घट जाएगी। अतः ब्रह्मास्त्र की चोट लगते ही वह जान-बूझकर बेहोश होकर पृथ्वी पर गिर पड़े। मेघनाद ने उन्हें नागपाश में बांध लिया और यही उससे भूल हुई। ब्रह्मास्त्र एक ऐसा अस्त्र है कि यदि उसके ऊपर किसी दूसरे अस्त्र-शस्त्र  का प्रयोग कर दिया जाए तो उसका प्रभाव अपने आप समाप्त हो जाता है। इस प्रकार मेघनाद की भूल से हनुमान जी स्वयं ही ब्रह्मास्त्र के प्रभाव से छुटकारा पा गए। उन्हें उसका प्रभाव नष्ट करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी।
कैसे जन्मे मकरध्वज ? 
(Kaise janme Makardhwaj?)
  • रावण की आज्ञा अनुसार हनुमान की पूछँ पर आग लगाई गयी तब महावीर हनुमान ने अपनी पूंछ की आग से पूरी लंका को जलाकर खाक कर दिया था। लंका से लौटते समय जब हनुमान आग बुझाने नदी में उतरे तो गर्मी और आग की वजह से उन्हें बहुत पसीना आ रहा था। उनके पसीने की कुछ बूंदे एक मछली के मुँह में गिरी जिसने उनके पुत्र को जन्म दिया। उस समय अहिरावण पाताललोक में राज करता था। उसके राज्य के लोगों को मछली काटने पर एक जीव मिला। उन्होंने उसे राजा को दे दिया और नाम रखा मकरध्वज। बड़ा होकर मकरध्वज बहुत ताकतवर हो गया और अहिरावण ने उसे पाताल के द्वार पर खड़े होकर उसे रक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी। महावीर हनुमान ने पाताल लोक में अहिरावण का वध करके अपने पुत्र मकरध्वज को वहाँ के राज्य सिंहासन पर बैठाया।
मंगलवार व्रत 
(Mangalvar Vart)
  • पुत्र की प्राप्ति के लिए मंगलवार का व्रत उत्तम माना जाता है। मंगलवार के दिन बन्दरों को गुड़, चने और केले खिलाने से हनुमान जी अधिक प्रसन्न होते है। इससे भक्तों के कष्ट, रोग और पीड़ा आदि दुख दूर होते है। ऐसा करने से संकट दूर होते है। परिवार में सुख समृद्धि आती है। मंगलवार का व्रत करने पर गेहूं और गुड़ का ही भोजन करना चाहिए। भोजन दिन रात में एक बार ही ग्रहण करना चाहिए। व्रत 21 हफ्ता तक रखना चाहिए। इस व्रत से मनुष्य के सभी दोष नष्ट हो जाते है।
  • हनुमान जयंती के दिन या किसी भी मंगलवार को सुबह उठकर स्नान करके 1 लोटा जल से हनुमानजी की मूर्ति को स्नान कराएं। पहले मंगल वार को एक दाना साबुत उड़द का हनुमानजी के सिर पर रखकर 11 परिक्रमा करें और मन ही मन अपनी मनोकामना हनुमानजी को कहें औ फिर वह उड़द का दाना लेकर घर लौट आएं तथा उसे अलग रख दें।
  • दूसरे मंगल वार को 1-1 उड़द का दाना रोज बढ़ाते रहें तथा लगातार यही प्रक्रिया करते रहें। 41 दिन 41 दाने रखने के बाद 42वें दिन से 1-1 दाना कम करते रहें। 81वें दिन का यह अनुष्ठान पूर्ण होने पर हनुमान जी मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद देते है। इस पूरी विधि के दौरान जितने भी उड़द के दाने आपने हनुमानजी को चढ़ाए है उन्हें नदी में प्रवाहित कर दें।
  • व्रत व पूजन के समय लाल वस्त्र धरण करके हनुमान जी को लाल पुष्प अर्पित करें। 
  • हनुमान जी को नारियल, धूप, दीप, सिंदूर अर्पित करें।
  • हनुमान अष्टमी के दिन हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।
  • राम रक्षा स्त्रोत, बजरंगबाण, हनुमान अष्टक का पाठ करें।
  • हनुमान आरती, हनुमत स्तवन, राम वन्दना, राम स्तुति, संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करें।
  • हनुमान जी को चमेली का तेल, सिंदूर का चोला, गुड़-चने चढ़ाएं। आटे से निर्मित प्रसाद वितरित करें।
  • मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान मंदिर में जाकर रामभक्त हनुमान का गुणगान करें।

रक्षा-लाभ मंत्र
अज्जनागर्भ सम्भूत कपीन्द्र सचिवोत्तम।
   रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमन् रक्ष सर्वदा।।

विजयरूपी मंत्र
पवन तनय बल पवन समाना।
बुद्धि विवेक विग्यान निधाना।

धन-समृद्धि मंत्र
मर्कटेश महोत्साह सर्वशोक विनाशन ।
शत्रुन संहर मां रक्षा श्रियं दापय में प्रभो।।

कार्य सिद्धि मंत्र
ऊँ हनुमते नमः

स्वस्थ स्वास्थ्य मंत्र
हनुमान अंगद रन गाजे।
हांके सुनकृत रचनीचर भाजे।।

सुंदरकांड विधान
  • सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से शनिवार तथा मंगलवार को करने पर सभी संकटों का नाश होता है। परन्तु आवश्यकता होने पर इसका पाठ कभी भी किया जा सकता है। पाठ करने से पहले भक्त को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद किसी निकट के मंदिर अथवा घर पर ही एक चैकी पर हनुमानजी की प्रतिमा को विराजमान कर स्वयं एक आसन पर बैठ जाएं। इसके बाद बजरंगबली की प्रतिमा को सादर फूल-माला, तिलक, चंदन, आदि पूजन सामग्री अर्पण करनी चाहिए। शनिवार तथा मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करने वाले को सभी संकटों से छुटकारा मिलता है और अनेक प्रकार से अच्छे परिणाम सामने आते हैं। इसके सस्वर पाठ से घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां यथा भूत-प्रेत, चुडैल, डायन आदि भी घर से चली जाती हैं। साथ ही घर के सदस्यों पर आए बड़े से बड़े संकटों सहज ही टल जाते हैं। इसके अलावा यदि जन्मकुंडली या गोचर में शनि, राहु, केतु या अन्य कोई दुष्ट ग्रह बुरा असर दे रहा है तो वह भी सहज ही टल जाता है। शनि की साढ़े साती व ढैय्या में इसका प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है। मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा को चमेली का तेल मिश्रित सिंदूर अर्पित करें। दीपक जलाने के बाद भगवान श्रीगणेश, शंकर-पार्वती, भगवान राम-सीता-लक्ष्मण तथा हनुमान जी को प्रणाम कर अपने गुरुदेव तथा पितृदेवों का स्मरण करें। तत्पश्चात हनुमानजी को मन-ही-मन ध्यान करते हुए सुंदरकांड का पाठ आरंभ करें। पूर्ण होने पर हनुमानजी की आरती करें, प्रसाद चढ़ाएं तथा वहां मौजूद सभी लोगों में बांटे। आपके सभी बिगड़े हुए काम तुंरत ही पूरे होंगे।

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