पारिजात का पौराणिक महत्व- Mythological significance of Parijat

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प्रयोग किया जाता है  in hindi इसलिए इस मनमोहक और सुगंधित पुष्प को हरसिंगार के नाम से भी जाना जाता है  in hindi इस वृक्ष का अपना बहुत महत्व माना जाता है  in hindi कहा जाता है कि पारिजात को छूने मात्र से ही व्यक्ति की थकावट मिट जाती है  in hindi यह फूल रात में ही खिलता है  in hindi और सुबह होते ही इसके सारे फूल झड़ जाते हैं  in hindi इसलिए इसे रात की रानी भी कहा जाता है  in hindi हरसिंगार का फूल पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प भी ह  in hindi दुनिया भर में इसकी सिर्फ पांच प्रजातियां पाई जाती हैं  in hindi कहा जाता है कि धन की देवी लक्ष्मी को पारिजात के फूल अत्यंत प्रिय हैं  in hindi पूजा-पाठ के दौरान मां लक्ष्मी को यह फूल अर्पित करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं  in hindi पूजा-पाठ में पारिजात के वे ही फूल इस्तेमाल किए जाते हैं  in hindi जो वृक्ष से टूटकर गिर जाते हैं  in hindi पूजा के लिए इस वृक्ष से फूल तोड़ना पूरी तरह से निषिद्ध है। एक मान्यता ये भी है  in hindi 14 साल के वनवास के दौरान माता सीता हरसिंगार के फूलों से ही अपना श्रृंगार करती थी  in hindi बाराबंकी जिले के पारिजात का वृक्ष को महाभारत के समय का माना जाता है  in hindi मान्यता है कि परिजात वृक्ष की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी  in hindi जिसे इन्द्र ने अपनी वाटिका में लगाया था  in hindi कहा जाता है  in hindi कि अज्ञातवास के दौरान माता कुंती ने पारिजात पुष्प से शिव पूजन करने की इच्छा जाहिर की थी  in hindi माता की इच्छा पूरी करने के लिए अर्जुन ने स्वर्ग से इस वृक्ष को लाकर यहां स्थापित कर दिया था  in hindi पारिजात के पत्तों में एंटी-आर्थि्रटिक गुण होते हैं  in hindi इसके अलावा  in hindi पत्तियों के काढ़े से लीवर की रक्षा करने वाले, एंटी-वायरल  in hindi, एंटी-फंगल  in hindi, एनाल्जेसिक  in hindi, एंटीपायरेटिक  in hindi, एंटी-इंफ्लैमेटरी, एंटीस्पास्मोडिक, हाइपोटेंसिव जैसे गुण भी पाए जाते है  in hindi इसकी पत्तियों में एंटी-लीशमैनियल गुण भी होते हैं  in hindi जो शरीर में परजीवियों को खत्म करने, जैसे पेट की कीड़ों की समस्या दूर करने में भी मदद कर सकते हैं  in hindi पारिजात के फूलों से सुगंधित तेल प्राप्त किया जाता है  in hindi इसमें निक्टैन्थीन नामक द्रव्य ग्लूकोसाइड की मात्रा होती है  in hindi हरसिंगार के पत्तों और फूलों में एंटी बैक्टीरियल और एंटी एलर्जिक गुण भी भरपूर मात्रा में पाए जा सकते हैं  in hindi पारिजात से अनेकों लाभ  in hindi सायटिका रोग  in hindi (Sciatica  in hindi) : इस वृक्ष के पत्ते और छाल विशेष रूप से उपयोगी होते हैं  in hindi  इसके पत्तों का सबसे अच्छा उपयोग गृध्रसी (सायटिका) रोग को दूर करने में किया जाता है  in hindi यह हलका, रूखा, तिक्त, कटु, गर्म, वात-कफनाशक, ज्वार नाशक, मृदु विरेचक, शामक, उष्णीय और रक्तशोधक होता है  in hindi सायटिका रोग को दूर करने का इसमें विशेष गुण है  in hindi अस्थमा के लिए (For asthma  in hindi) : औषधीय अध्ययनों के मुताबिक हरसिंगार के पत्ते एंटी-अस्थमाटिक  in hindi और एंटी-एलर्जीक गुणों से समृद्ध होते हैं  in hindi इसकी पत्तियों का अर्क नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन बढ़ाकर नाक की नली को आराम पहुंचाने में मदद कर सकता है  in hindi अस्थमा में नाक की नली सूज जाती है  in hindi और उसके आसपास की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं  in hindi प्राचीन काल से ही हरसिंगार का इस्तेमाल अस्थमा को ठीक करने के लिए किया जाता रहा है  in hindi इसके फूलों को सूखाकर पाउडर बनाने के बाद इसे उपयोग में लाया जा सकता है  in hindi पाचन (Digestion  in hindi ) : हरसिंगार का इस्तेमाल पाचन प्रक्रिया के लिए अच्छा होता है  in hindi इसकी पत्तियों के रस के उपयोग से पेट में मौजूद भोजन को पचाने में मदद मिलती है  in hindi  हरसिंगार में एंटी स्पस्मोडिक गुण पाए जाते हैं  in hindi जो पाचन तंत्र को स्वस्थ बनता है  in hindi गठिया (Arthritis  in hindi) : हरसिंगार में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं  in hindi इसलिए यह गठिया के मरीजों के लिए लाभदायक होता है  in hindi हरसिंगार का अर्क गठिया को बढ़ने से रोक सकता है  in hindi तनाव (Stress  in hindi) : हरसिंगार का पौधा एंटीडिप्रेसेंट गुण से समृद्ध होता है  in hindi ऐसे में इसके सेवन से आप तनाव और अवसाद से खुद को बचा सकते हैं  in hindi मांसपेशियों का दर्द  in hindi हरसिंगार के पत्तों का रस एवं अदरक का रस आपस में मिलाकर प्रातः खाली पेट पीने से मांसपेशियों का दर्द समाप्त हो जाता है  in hindi एंटीबैक्टीरियल  in hindi (Antibacterial  in hindi) : हरसिंगार के फूल का इस्तेमाल कई तरह के बैक्टीरियल रोगों से लड़ने के लिए किया जाता है  in hindi जैसे जुखाम  in hindi बुखार और खांसी  in hindi दरअसल, हरसिंगार में भरपूर एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं  in hindi जो शरीर को कीटाणुओं से बचाकर स्वस्थ रखने में मदद करते हैं  in hindi हृदय संबंधी  in hindi (Cardiovascular  in hindi) : उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और मोटापे के कारण हृदय का स्वास्थ्य बिगाड़ जाता है  in hindi हरसिंगार की जड़ की छाल के इस्तेमाल से डायबिटीज के दौरान बढ़ने वाले लिपिड सिरम और ट्राइग्लिसराइड्स को कम किया जा सकता है  in hindi प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए  in hindi (To increase immunity  in hindi) :  हरसिंगार के पत्तों का इस्तेमाल हर्बल टी के तौर पर किया जा सकता है  in hindi जो शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने का सबसे अच्छा स्त्रोत हो सकता है  in hindi इसके पत्तों का इस्तेमाल चाय में करने के साथ ही  in hindi इसका रस भी नियमित रूप से पिया जा सकता है  in hindi डेंगू  in hindi (Dengue  in hindi) : डेंग के समय हड्डियों के दर्द को कम करने के लिए में सहायता करता है  in hindi शरीर के इस दर्द को दूर करने के लिए हरसिंगार की पत्तियों से बने काढ़े का उपयोग चाहिए  in hindi पाइल्स  in hindi (Piles  in hindi) : हरसिंगार के इस्तेमाल से पाइल्स के जोखिम को दूर कर सकते हैं  in hindi पाइल्स के कारण मल द्वार में सूजन आ जाती है  in hindi जिससे मल निकासी में परेशानी होती है  in hindi हरसिंगार में लैक्सेटिव और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं  in hindi जिससे मल निकासी में मदद मिलेगी  in hindi और सूजन को भी आराम मिलता है  in hindi पाइल्स की समस्या कब्ज की वजह से भी हो सकती है  in hindi ऐसे में आप हरसिंगार के फूलों और बीजों का इस्तेमाल कब्ज और पाइल्स दोनों को ठीक करने में किया जाता है  in hindi एसिडिटी (Acidity  in hindi) : हरसिंगर लैक्सेटिव गुणों से समृद्ध होता है  in hindi यह पाचन प्रक्रिया में मदद करता है  in hindi और गैस की समस्या को दूर करने में सहायता करता है  in hindi खांसी  in hindi (Cough  in hindi) : हरसिंगार बतौर एक्सपेक्टोरेन्टे शरीर में काम कर सकता है  in hindi एक्सपेक्टोरेंट बलगम को गले से निकालने और खांसी ठीक करने में मदद करता है  in hindi साथ ही इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं  in hindi जो खांसी से संबंधित बैक्टीरिया को शरीर में नष्ट करने का काम करता हैे  in hindi घाव  in hindi (Wound  in hindi) : हरसिंगार का इस्तेमाल घाव को भरने के लिए भी किया जाता है  in hindi इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण घाव को भर सकते हैं  in hindi डायबिटीज (Diabetes  in hindi) : हरसिंगार में लिनोलिक एसिड पाया जाता है  in hindi जो डायबिटीज को कम करने में मदद करता है। हरसिंगार की जड़ की छाल में महत्वपूर्ण एंटी-डायबिटिक गतिविधि पाई गई है  in hindi यह अर्क में रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है  in hindi संक्रमण रोक-थाम  in hindi (Infection prevention  in hindi) : दाद-खुजली एक त्वचा संक्रमण है  in hindi जो फंगस के कारण शरीर पर होता है  in hindi हरसिंगार के बीज, पत्तियां व फूल सभी में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं  in hindi जो दाद को ठीक करने में मदद करता है  in hindi दाद-खुजली वाली जगह में हरसिंगार का पेस्ट लगाना चाहिए  in hindi मलेरिया (Malaria  in hindi) : मलेरिया एक गंभीर बीमारी है  in hindi जो घातक भी सिद्ध हो सकती है  in hindi यह बीमारी पैरासाइट से संक्रमित मच्छरों के काटने की वजह से होती है  in hindi मलेरिया से बचाने में हरसिंगार आपकी मदद कर सकता है  in hindi हरसिंगार में पैरासाइट को खत्म करने की ताकत होती है in hindi बुखार (Fever in hindi) : हरसिंगार की जड़ और पत्तों में एंटीपाइरेटिक गुण पाए जाते हैं in hindi जो बुखार में सहायता करता है in hindi हरसिंगार के पत्तों के रस को सीधे पीने से या इसमें अदरक मिलाकर पीने से बुखार में राहत मिलती है in hindi बालों की रूसी (Dandruff in hindi ) : हरसिंगार के बीज को पानी के साथ पीसकर सिर के गंजेपन की जगह लगाने से सिर में नये बाल आना शुरू हो जाते हैं in hindi इसके साथ ही यह रूसी और सफेद बालों को भी ठीक करता है in hindi 50 ग्राम हरसिंगार के बीज पीस कर 1 लीटर पानी में मिलाकर बाल धोने से रुसी समाप्त हो जाती है in hindi सौन्दर्य वर्धक in hindi (Beauty enhancer in hindi) :  हरसिंगार के फूलों का पेस्ट in hindi और मैदा को दूध मिलाकर उबटन बना लें in hindi शरीर पर लेप करने के 30 मिनट बाद स्नान कर लें in hindi इस प्रयोग से त्वचा में निखार आता है in hindi इसके तेल से मसाज करने पर त्वचा में लचीलापन आता है in hindi , sakshambano in hindi, sakshambano in eglish, 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पारिजात का पौराणिक महत्व

पारिजात का पौधा आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। इसके फल, पत्ते, बीज, फूल और यहां तक कि इसकी छाल तक का इस्तेमाल विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता है। पारिजात के फूल को भगवान श्रीहरि के श्रृंगार और पूजन में प्रयोग किया जाता है, इसलिए इस मनमोहक और सुगंधित पुष्प को हरसिंगार के नाम से भी जाना जाता है। इस वृक्ष का अपना बहुत महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि पारिजात को छूने मात्र से ही व्यक्ति की थकावट मिट जाती है। यह फूल रात में ही खिलता है और सुबह होते ही इसके सारे फूल झड़ जाते हैं। इसलिए इसे रात की रानी भी कहा जाता है। हरसिंगार का फूल पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प भी है। दुनिया भर में इसकी सिर्फ पांच प्रजातियां पाई जाती हैं। 

कहा जाता है कि धन की देवी लक्ष्मी को पारिजात के फूल अत्यंत प्रिय हैं। पूजा-पाठ के दौरान मां लक्ष्मी को यह फूल अर्पित करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। पूजा-पाठ में पारिजात के वे ही फूल इस्तेमाल किए जाते हैं जो वृक्ष से टूटकर गिर जाते हैं। पूजा के लिए इस वृक्ष से फूल तोड़ना पूरी तरह से निषिद्ध है। एक मान्यता ये भी है 14 साल के वनवास के दौरान माता सीता हरसिंगार के फूलों से ही अपना श्रृंगार करती थी। बाराबंकी जिले के पारिजात का वृक्ष को महाभारत के समय का माना जाता है। मान्यता है कि परिजात वृक्ष की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी जिसे इन्द्र ने अपनी वाटिका में लगाया था। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान माता कुंती ने पारिजात पुष्प से शिव पूजन करने की इच्छा जाहिर की थी। 

माता की इच्छा पूरी करने के लिए अर्जुन ने स्वर्ग से इस वृक्ष को लाकर यहां स्थापित कर दिया था। पारिजात के पत्तों में एंटी-आर्थि्रटिक गुण होते हैं। इसके अलावा, पत्तियों के काढ़े से लीवर की रक्षा करने वाले, एंटी-वायरल, एंटी-फंगल, एनाल्जेसिक, एंटीपायरेटिक, एंटी-इंफ्लैमेटरी, एंटीस्पास्मोडिक, हाइपोटेंसिव जैसे गुण भी पाए जाते है। इसकी पत्तियों में एंटी-लीशमैनियल गुण भी होते हैं, जो शरीर में परजीवियों को खत्म करने, जैसे पेट की कीड़ों की समस्या दूर करने में भी मदद कर सकते हैं। पारिजात के फूलों से सुगंधित तेल प्राप्त किया जाता है। इसमें निक्टैन्थीन नामक द्रव्य ग्लूकोसाइड की मात्रा होती है। हरसिंगार के पत्तों और फूलों में एंटी बैक्टीरियल और एंटी एलर्जिक गुण भी भरपूर मात्रा में पाए जा सकते हैं।


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पारिजात से अनेकों लाभ 
(Many benefits from Parijat in hindi)

पारिजात पाचन के लिए (Digestion ) : हरसिंगार का इस्तेमाल पाचन प्रक्रिया के लिए अच्छा होता है। इसकी पत्तियों के रस के उपयोग से पेट में मौजूद भोजन को पचाने में मदद मिलती है। हरसिंगार में एंटी स्पस्मोडिक गुण पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ बनता है।

पारिजात अस्थमा के लिए (For asthma) : औषधीय अध्ययनों के मुताबिक हरसिंगार के पत्ते एंटी-अस्थमाटिक और एंटी-एलर्जीक गुणों से समृद्ध होते हैं। इसकी पत्तियों का अर्क नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन बढ़ाकर नाक की नली को आराम पहुंचाने में मदद कर सकता है। अस्थमा में नाक की नली सूज जाती है और उसके आसपास की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। प्राचीन काल से ही हरसिंगार का इस्तेमाल अस्थमा को ठीक करने के लिए किया जाता रहा है। इसके फूलों को सूखाकर पाउडर बनाने के बाद इसे उपयोग में लाया जा सकता है।

पारिजात साइटिका रोग के लिए (Sciatica) : इस वृक्ष के पत्ते और छाल विशेष रूप से उपयोगी होते हैं। इसके पत्तों का सबसे अच्छा उपयोग गृध्रसी (सायटिका) रोग को दूर करने में किया जाता है। यह हलका, रूखा, तिक्त, कटु, गर्म, वात-कफनाशक, ज्वार नाशक, मृदु विरेचक, शामक, उष्णीय और रक्तशोधक होता है। सायटिका रोग को दूर करने का इसमें विशेष गुण है।

पारिजात गठिया रोग के लिए (Arthritis) : हरसिंगार में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं, इसलिए यह गठिया के मरीजों के लिए लाभदायक होता है। हरसिंगार का अर्क गठिया को बढ़ने से रोक सकता है।

पारिजात तनाव के लिए (Stress) : हरसिंगार का पौधा एंटीडिप्रेसेंट गुण से समृद्ध होता है। ऐसे में इसके सेवन से आप तनाव और अवसाद से खुद को बचा सकते हैं। 

पारिजात मांसपेशियों के दर्द के लिए: हरसिंगार के पत्तों का रस एवं अदरक का रस आपस में मिलाकर प्रातः खाली पेट पीने से मांसपेशियों का दर्द समाप्त हो जाता है। 

पारिजात एंटीबैक्टीरियल के लिए (Antibacterial) : हरसिंगार के फूल का इस्तेमाल कई तरह के बैक्टीरियल रोगों से लड़ने के लिए किया जाता है, जैसे जुखाम, बुखार और खांसी। दरअसल, हरसिंगार में भरपूर एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो शरीर को कीटाणुओं से बचाकर स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

पारिजात हृदय संबंधी रोग के लिए (Cardiovascular) : उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और मोटापे के कारण हृदय का स्वास्थ्य बिगाड़ जाता है। हरसिंगार की जड़ की छाल के इस्तेमाल से डायबिटीज के दौरान बढ़ने वाले लिपिड सिरम और ट्राइग्लिसराइड्स को कम किया जा सकता है।

पारिजात प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए (To increase immunity) :  हरसिंगार के पत्तों का इस्तेमाल हर्बल टी के तौर पर किया जा सकता है। जो शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने का सबसे अच्छा स्त्रोत हो सकता है। इसके पत्तों का इस्तेमाल चाय में करने के साथ ही, इसका रस भी नियमित रूप से पिया जा सकता है।

पारिजात डेंगू रोग के लिए (Dengue) : डेंग के समय हड्डियों के दर्द को कम करने के लिए में सहायता करता है। शरीर के इस दर्द को दूर करने के लिए हरसिंगार की पत्तियों से बने काढ़े का उपयोग चाहिए।

पारिजात पाइल्स रोग के लिए (Piles)हरसिंगार के इस्तेमाल से पाइल्स के जोखिम को दूर कर सकते हैं। पाइल्स के कारण मल द्वार में सूजन आ जाती है जिससे मल निकासी में परेशानी होती है। हरसिंगार में लैक्सेटिव और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जिससे मल निकासी में मदद मिलेगी और सूजन को भी आराम मिलता है। पाइल्स की समस्या कब्ज की वजह से भी हो सकती है। ऐसे में आप हरसिंगार के फूलों और बीजों का इस्तेमाल कब्ज और पाइल्स दोनों को ठीक करने में किया जाता है।

पारिजात एसिडिटी के लिए (Acidity) : हरसिंगर लैक्सेटिव गुणों से समृद्ध होता है। यह पाचन प्रक्रिया में मदद करता है और गैस की समस्या को दूर करने में सहायता करता है।

पारिजात खांसी के लिए (Cough) : हरसिंगार बतौर एक्सपेक्टोरेन्टे शरीर में काम कर सकता है। एक्सपेक्टोरेंट बलगम को गले से निकालने और खांसी ठीक करने में मदद करता है। साथ ही इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं जो खांसी से संबंधित बैक्टीरिया को शरीर में नष्ट करने का काम करता है।

पारिजात घाव के लिए (Wound) : हरसिंगार का इस्तेमाल घाव को भरने के लिए भी किया जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण घाव को भर सकते हैं। 

पारिजात डायबिटीज के लिए (Diabetes) : हरसिंगार में लिनोलिक एसिड पाया जाता है जो डायबिटीज को कम करने में मदद करता है। हरसिंगार की जड़ की छाल में महत्वपूर्ण एंटी-डायबिटिक गतिविधि पाई गई है। यह अर्क में रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है।

पारिजात संक्रमण रोक-थाम के लिए (Infection prevention) : दाद-खुजली एक त्वचा संक्रमण है जो फंगस के कारण शरीर पर होता है। हरसिंगार के बीज, पत्तियां व फूल सभी में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो दाद को ठीक करने में मदद करता है। दाद-खुजली वाली जगह में हरसिंगार का पेस्ट लगाना चाहिए।

पारिजात मलेरिया के लिए (Malaria) : मलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जो घातक भी सिद्ध हो सकती है। यह बीमारी पैरासाइट से संक्रमित मच्छरों के काटने की वजह से होती है। मलेरिया से बचाने में हरसिंगार आपकी मदद कर सकता है। हरसिंगार में पैरासाइट को खत्म करने की ताकत होती है।

पारिजात बुखार के लिए (Fever) : हरसिंगार की जड़ और पत्तों में एंटीपाइरेटिक गुण पाए जाते हैं, जो बुखार में सहायता करता है। हरसिंगार के पत्तों के रस को सीधे पीने से या इसमें अदरक मिलाकर पीने से बुखार में राहत मिलती है।

पारिजात बालों की रूसी के लिए (Dandruff ) : हरसिंगार के बीज को पानी के साथ पीसकर सिर के गंजेपन की जगह लगाने से सिर में नये बाल आना शुरू हो जाते हैं। इसके साथ ही यह रूसी और सफेद बालों को भी ठीक करता है। 50 ग्राम हरसिंगार के बीज पीस कर 1 लीटर पानी में मिलाकर बाल धोने से रुसी समाप्त हो जाती है। 

पारिजात सौन्दर्य वर्धक के लिए (Beauty enhancer) :  हरसिंगार के फूलों का पेस्ट और मैदा को दूध मिलाकर उबटन बना लें। शरीर पर लेप करने के 30 मिनट बाद स्नान कर लें। इस प्रयोग से त्वचा में निखार आता है। इसके तेल से मसाज करने पर त्वचा में लचीलापन आता है।